
पटना। बिहार के पांच राज्यसभा सीटाें पर हुए चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की जीत हुई लेकिन चुनाव के नतीजों ने महागठबंधन को बड़ा झटका दिया है। राजद की हार ने घर का भेदी लंका ढाये के कहावत काे चरित्रार्थ कर दिखाया।
ऐसा इसलिए कि राजद ने अपने उम्मीदवार काे जीत दिलाते के लिए कम पड़ रही सीटाें का जुगाड ताे कर लिया लेकिन उनके वाे विधायक जाे पहले से उनके पक्ष में खड़े नजर आ रहे थे, उन्हें एकजुट करने में विफल रहे।
यही कारण है कि मतदान के ऐन वक्त पर कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक की अनुपस्थिति राजद के हार का मुख्य कारण बनी। हालांकि राजनीति में सब संभव है।
इस चुनाव में एनडीए ने मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री राम नाथ ठाकुर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और भाजपा के शिवेश कुमार को उम्मीदवार बनाया था। सभी पांचों उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे।
विधानसभा में हुए मतदान में एनडीए के 202 विधायकों ने वोट डाला, जबकि महागठबंधन के केवल 37 विधायक ही मतदान में शामिल हुए। महागठबंधन की ओर से कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास, सुरेंद्र कुशवाहा, मनोहर प्रसाद सिंह और राजद विधायक फैसल रहमान मतदान के लिए नहीं पहुंचे।
मतों की गिनती शाम पांच बजे से शुरू हो गई। प्रथम वरीयता में नीतीश कुमार को 44 वोट मिले, नितिन नबीन को 44, रामनाथ ठाकुर को 42, उपेंद्र कुशवाहा को 42 वोट और शिवेश राम को 30 वोट मिले।
वहीं महागठबंधन के उम्मीदवार एडी सिंह को 38 वोट मिले। द्वितीय वरीयता में भाजपा के शिवेश राम को जीत मिली और इस तरह एनडीए के सभी उम्मीदवारों ने जीत हासिल कर ली।
बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं और इस बार राज्यसभा की 5 सीटों के लिए चुनाव हुआ था। हालांकि चुनाव में कुल 6 उम्मीदवार मैदान में थे, इसलिए नतीजों पर सभी की नजर बनी हुई थी।
विधानसभा में एनडीए के पास 202 विधायक हैं, जबकि महागठबंधन के पास लगभग 35 विधायक हैं। इसी मजबूत गणित के चलते एनडीए ने राज्यसभा चुनाव में सभी सीटों पर जीत हासिल कर ली।
भाजपा ने किया ‘मशीन तंत्र’ और ‘धन तंत्र’ का प्रयोग: तेजस्वी
चुनाव परिणामों के बाद राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि भाजपा ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का गला घोंटा है। उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन की ताकत पर्याप्त थी, लेकिन ऐन वक्त पर विधायकों की ‘खरीद-फरोख्त’ और दबाव की राजनीति ने नतीजों को प्रभावित किया।
तेजस्वी ने स्पष्ट किया कि वे झुकने वालों में से नहीं हैं और इस ‘छल’ का जवाब जनता की अदालत में देंगे।
हार से विचलित हुए बिना तेजस्वी यादव ने इसे एक नए संघर्ष की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने केवल बिहार में ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी इसी तरह की ‘मशीन तंत्र’ और ‘धन तंत्र’ का प्रयोग किया है। तेजस्वी ने कहा राजद अब इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रदेश भर में जनजागरण अभियान चलाने की तैयारी में है।
उन्होंने बताया कि एआईएमआईएम के पाँच विधायकों और बसपा के एक विधायक ने मजबूती से महागठबंधन के प्रत्याशी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ये वोट इस बात का प्रमाण हैं कि बिहार में अभी भी सांप्रदायिक और अनैतिक राजनीति के खिलाफ एक साझा मोर्चा सक्रिय है।
वोटों के गणित और रणनीति पर सवाल
राजद प्रत्याशी एडी सिंह ने मतदान के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि महागठबंधन के पास शुरुआत में मजबूत बढ़त थी। उन्होंने कहा कि उन्हें 37 वोट मिले थे, जबकि विपक्षी खेमे के सुहेल राम को मात्र 30 वोट प्राप्त हुए थे।
हालांकि, सेकंड प्रेफरेंस (द्वितीय वरीयता) के वोटों की गिनती और अचानक हुए बदलावों ने पासा पलट दिया। एडी सिंह ने इसे रणनीतिक हार के बजाय लोकतांत्रिक मूल्यों की हार करार दिया।
विधायकों की अनुपस्थिति और क्रॉस वोटिंग
चुनाव के दौरान कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक की अनुपस्थिति हार का मुख्य कारण बनी। तेजस्वी यादव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो लोग विपरीत विचारधारा के सामने घुटने टेक गए, उनके खिलाफ बाद में उचित निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ की ओर इशारा करते हुए कहा कि भाजपा का ‘चाल, चरित्र और चेहरा’ हमेशा से ही धनबल और तंत्र के दुरुपयोग का रहा है, जिसका शिकार इस बार बिहार के जनमत को बनाया गया।
एआईएमआईएम ने कांग्रेस और राजद पर उठाये सवाल
एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन ने राज्यसभा चुनाव के परिणामों के बाद कांग्रेस और राजद की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जो दल कल तक ओवैसी साहब और एआईएमआईएम पर भाजपा की ‘बी-टीम’ होने का आरोप लगाते थे, आज उनके खुद के विधायक भाजपा के पाले में खड़े नजर आ रहे हैं।
हसन ने कहा कि एआईएमआईएम का स्टैंड हमेशा से स्पष्ट रहा है और पार्टी ने पूरी ईमानदारी के साथ भाजपा के खिलाफ मतदान किया है।

