


रांची: कोडरमा के चंदवाड़ा क्षेत्र में लगभग 87.41 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले को लेकर हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सरकार द्वारा दाखिल शपथ पत्र पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि शपथ पत्र में कई जरूरी बातें साफ नहीं की गई हैं।





जानकारी अधूरी होने पर सवाल
कोर्ट ने पाया कि सरकारी जमीन का कितना हिस्सा वास्तव में खाली है, इसका स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। साथ ही विवादित हिस्से का भी सही-सही उल्लेख नहीं किया गया। अदालत ने यह भी कहा कि मामले से जुड़े कोई नक्शे, प्लान या फोटो रिकॉर्ड में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की स्थिति भी स्पष्ट नहीं बताई गई है।
सरकार से मांगा नया शपथ पत्र
सरकार की ओर से कहा गया कि अधिकांश जमीन खाली है और सरकारी कब्जे में है, जबकि थोड़ा हिस्सा विवादित है, जहां से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन कोर्ट ने इस जवाब को अस्पष्ट मानते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह 2 अप्रैल 2026 तक नया और विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करे। इसमें जमीन का पूरा ब्योरा, विवादित हिस्से की जानकारी, नक्शा और फोटो शामिल करने को कहा गया है।
अगली सुनवाई की तारीख तय
खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को भी सबूतों के साथ अपना पक्ष रखने की अनुमति दी है। मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल 2026 को होगी। याचिकाकर्ता अरविंद कुमार सिंह ने आरोप लगाया है कि कई शिकायतों के बावजूद प्रशासन द्वारा सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
