
US Navy Warship : वैश्विक समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ते तनाव के बीच USS George H.W. Bush ने अपना पारंपरिक रास्ता छोड़कर लंबा मार्ग अपनाया है। दुनिया के सबसे शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर में शामिल यह अमेरिकी युद्धपोत अब सीधे रेड सी से गुजरने के बजाय अफ्रीका का चक्कर लगाते हुए मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कैरियर के साथ तीन डेस्ट्रॉयर और करीब 6000 नाविक मौजूद हैं। यह पूरा स्ट्राइक ग्रुप मिडिल ईस्ट में तैनाती के उद्देश्य से रवाना हुआ है। आमतौर पर अमेरिकी युद्धपोत जिब्राल्टर, भूमध्य सागर और स्वेज नहर के रास्ते रेड सी में प्रवेश करते हैं, लेकिन इस बार सुरक्षा कारणों से इस मार्ग से बचा गया है।
दरअसल, हूती विद्रोही द्वारा रेड सी और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य क्षेत्र में लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरे को देखते हुए अमेरिका ने यह रणनीतिक फैसला लिया है। इन विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त माना जाता है, जिससे इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से हर साल लगभग 20 हजार जहाज गुजरते हैं और वैश्विक व्यापार का करीब 10% हिस्सा इसी रास्ते से संचालित होता है। खासकर तेल और गैस की आपूर्ति के लिए यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस इलाके में बढ़ता खतरा अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
यह भी उल्लेखनीय है कि USS George H.W. Bush एक निमिट्ज क्लास परमाणु ऊर्जा से चलने वाला सुपरकैरियर है, जो अमेरिकी नौसेना के सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में गिना जाता है। यह मार्च के अंत में नॉरफोक बेस से रवाना हुआ था और हाल ही में नामीबिया के तट के पास देखा गया।
इसी बीच, USS Abraham Lincoln और USS Gerald R. Ford जैसे अन्य अमेरिकी सुपरकैरियर भी इस क्षेत्र के आसपास सक्रिय हैं, जिससे यह साफ है कि अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत कर रहा है।
कुल मिलाकर, बदलते समुद्री रास्ते और बढ़ती सैन्य गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव लगातार गहराता जा रहा है।

