
सरकार ने जारी की अधिसूचना
नई दिल्ली : हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने अपनी एक और बजट घोषणा को अमलीजामा पहना दिया है। सरकार ने जनप्रतिनिधियों के वेतन का एक हिस्सा छह महीने के लिए अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लागू कर दिया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद मुख्य सचिव की ओर से इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है।
इस अधिसूचना के तहत मुख्यमंत्री के वेतन में 50 प्रतिशत की, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का 30 प्रतिशत वेतन और सभी विधायकों का 20 प्रतिशत वेतन अगले छह महीनों के लिए स्थगित रहेगा। यह निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 162 और 166 के तहत लिया गया है। ये भी स्पष्ट किया है कि यह स्थायी कटौती नहीं, बल्कि केवल अस्थायी स्थगन है। यानी यह राशि भविष्य में राज्य की वित्तीय स्थिति सुधरने पर जनप्रतिनिधियों को वापस दी जाएगी। सरकार ने साफ किया है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी। ई-सैलरी सिस्टम में पूरा वेतन और स्थगित हिस्सा अलग-अलग दिखेगा। वेतन पर्ची में भी इसका स्पष्ट उल्लेख होगा और इससे कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों को हर स्तर पर स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
इस फैसले का निर्णय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट भाषण में लिया था। उस समय उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों (क्लास-1 और क्लास-2) के वेतन को भी डेफर करने का संकेत दिया था, लेकिन हिमाचल दिवस के मौके पर इस फैसले को वापस ले लिया गया। मुख्य सचिव संजय गुप्ता की ओर से जारी अधिसूचना में केवल जनप्रतिनिधियों के वेतन स्थगन का ही जिक्र है। धिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आयकर सहित सभी वैधानिक कटौतियां पूरे वेतन पर ही लागू होंगी। स्थगित राशि की गणना टैक्स और अन्य कटौतियों के बाद बची राशि पर की जाएगी। इससे भविष्य में लेखा या टैक्स से जुड़ी कोई जटिलता न हो, इसका ध्यान रखा गया है। जिन जनप्रतिनिधियों ने हाउस बिल्डिंग एडवांस या मोटर कार एडवांस लिया हुआ है, उनके लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।

