10 जून से झारखंड में बालू उठाव पर रोक, 15 अक्टूबर तक निर्माण कार्यों पर असर की आशंका

झारखंड में 10 जून से 15 अक्टूबर तक बालू उठाव पर रोक लागू होगी। इससे निर्माण कार्य, सरकारी योजनाएं, मजदूरों का रोजगार और बाजार में बालू की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है।

Razi Ahmad
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Jharkhand Sand Crisis : झारखंड में मानसून शुरू होने से पहले ही बालू संकट गहराने के संकेत मिलने लगे हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशानुसार राज्य की नदियों से 10 जून से 15 अक्टूबर 2026 तक बालू उठाव पर पूर्ण प्रतिबंध लागू रहेगा। इससे निर्माण कार्यों, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर व्यापक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

राज्य सरकार ने बालू घाटों के संचालन की जिम्मेदारी झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (JSMDC) से लेकर जिला उपायुक्तों (DC) को सौंपने का फैसला किया था, लेकिन कई जिलों में अब तक नीलामी और एग्रीमेंट प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। खान विभाग के निर्देशों के बावजूद व्यवस्था पूरी तरह जमीन पर लागू नहीं होने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

444 घाटों में सिर्फ 13 से हो रही वैध आपूर्ति

जानकारी के मुताबिक, राज्य में कुल 444 बालू घाट चिन्हित हैं। इनमें 298 घाटों की नीलामी पूरी हो चुकी है, जबकि 146 घाट अब भी कानूनी और प्रशासनिक अड़चनों में फंसे हैं। नीलामी के बाद भी केवल 35 ठेकेदार आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर सके हैं और उनमें से सिर्फ 13 घाटों को एग्रीमेंट की मंजूरी मिली है। एग्रीमेंट के बिना वैध बालू उठाव संभव नहीं है।

निर्माण योजनाओं पर पड़ सकता है असर

झारखंड में रोजाना करीब 1.5 से 2 लाख घन फीट बालू की मांग रहती है, खासकर निर्माण सीजन में। लेकिन वर्तमान में मांग और वैध आपूर्ति के बीच करीब 60 प्रतिशत की कमी बताई जा रही है। इसका असर अबुआ आवास योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क निर्माण और पुल-पुलिया परियोजनाओं पर पड़ सकता है।

साथ ही, बाजार में बालू की कमी के कारण कीमतों में बढ़ोतरी और अवैध खनन को बढ़ावा मिलने की आशंका भी जताई जा रही है।

हजारों मजदूरों के सामने रोजगार संकट

बालू उठाव बंद होने से रोजगार पर भी बड़ा असर पड़ सकता है। अनुमान है कि बालू घाटों पर काम करने वाले 50 से 70 हजार मजदूरों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी। इसके अलावा राजमिस्त्री, दिहाड़ी मजदूर, ट्रक और हाइवा चालक समेत निर्माण क्षेत्र से जुड़े 3 से 4 लाख लोगों पर भी असर पड़ने की संभावना है।

DC कार्यालयों में लंबित हैं फाइलें

सूत्रों के अनुसार, 22 बालू घाटों से जुड़ी एग्रीमेंट फाइलें विभिन्न जिलों के DC कार्यालयों में लंबित हैं। इनमें दुमका, खूंटी, रामगढ़, रांची, हजारीबाग, गोड्डा, लातेहार, जामताड़ा और पूर्वी सिंहभूम शामिल हैं। समय रहते मंजूरी नहीं मिलने पर मानसून से पहले राहत की संभावना और कम हो सकती है।

Share This Article
रजी अहमद एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग दो वर्षों का अनुभव है। उन्होंने न्यूज़ अरोमा में काम करते हुए विभिन्न विषयों पर लेखन किया और अपनी लेखन शैली को मजबूत बनाया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग, न्यूज़ लेखन और मीडिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं में अच्छा अनुभव हासिल किया। वह लगातार सीखते हुए अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं।