एआई ने खोले 3,500 वर्ष पुरानी सभ्यता के रहस्य

Manu Shrivastava
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शोधकर्ताओं ने “पैलियोग्राफिकम” नामक एक अत्याधुनिक एआई टूल विकसित किया है, जो कीलाकार लिपि (क्यूनिफॉर्म) में लिखी प्राचीन मिट्टी की गोलियों को पढ़ने और समझने के तरीके को पूरी तरह बदल रहा है। यह तकनीक विशेष रूप से हित्ती सभ्यता से जुड़ी हजारों साल पुरानी मिट्टी की पट्टियों के अध्ययन में क्रांतिकारी साबित हो रही है।

 

कैसे काम करता है पैलियोग्राफिकम?

 

पैलियोग्राफिकम एक उन्नत पैटर्न-पहचान प्रणाली है, जो मिट्टी पर उकेरे गए कीलनुमा अक्षरों में मौजूद सूक्ष्म भिन्नताओं को पहचान सकती है। यह सॉफ्टवेयर 70,000 डिजिटाइज्ड तस्वीरों का विश्लेषण करता है, जिनमें 50 लाख से अधिक क्यूनिफॉर्म अक्षर शामिल हैं। एआई तकनीक समान या लगभग समान लिपि संरचनाओं का तुरंत पता लगाकर शोधकर्ताओं की मदद करती है।

 

दिनों का काम अब मिनटों में

 

दुर्जबर्ग विश्वविद्यालय के प्राचीन निकट पूर्वी अध्ययन विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डैनियल श्वमर के अनुसार, यह तकनीक शोध कार्य को पूरी तरह बदल रही है। पहले जहां मिट्टी के कुछ टुकड़ों की तुलना करने में कई दिन लग जाते थे, वहीं अब वही कार्य कुछ मिनटों में पूरा हो जाता है। इससे शोधकर्ताओं के हजारों घंटों की बचत हो रही है।

 

हित्ती सभ्यता के रहस्यों से उठेगा पर्दा

 

हित्ती सभ्यता लगभग 1600 ईसा पूर्व में वर्तमान तुर्की क्षेत्र में विकसित हुई थी। इस सभ्यता ने मिट्टी की पट्टियों पर विशाल मात्रा में लिखित रिकॉर्ड छोड़े थे। समय के साथ ये पट्टियां टूट गईं और उनके टुकड़े दुनिया भर के संग्रहालयों में बिखर गए। एआई टूल अब इन टुकड़ों को जोड़कर प्राचीन दस्तावेजों को फिर से पढ़ने योग्य बना रहा है।

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