
RIMS 2 Project : झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में रिम्स-2 परियोजना को लेकर सोमवार को महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) की टीम ने परियोजना की प्रगति और तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की।
4200 करोड़ की लागत से बनेगा वर्ल्ड क्लास अस्पताल
बैठक में जानकारी दी गई कि रिम्स-2 परियोजना पर कुल लगभग 4200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें करीब 2600 करोड़ रुपये का लोन एशियाई विकास बैंक द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। एडीबी की टीम फिलहाल परियोजना के *फैक्ट फाइंडिंग मिशन के तहत रांची पहुंची हुई है।
बैठक के दौरान निर्माण प्रक्रिया, वित्तीय प्रबंधन, अस्पताल की क्षमता, भवन संरचना, पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों और भविष्य की स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए गहन चर्चा की गई।
विश्वस्तरीय इलाज और रिसर्च का बनेगा केंद्र
अजय कुमार सिंह ने कहा कि रिम्स-2 को केवल अस्पताल नहीं, बल्कि अत्याधुनिक चिकित्सा, मेडिकल एजुकेशन, रिसर्च और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं से लैस समग्र स्वास्थ्य संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि झारखंड के लोगों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल का डिजाइन, इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी व्यवस्था और कंसल्टेंसी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगी तथा गुणवत्ता और समयसीमा दोनों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 से शुरू हो सकता है निर्माण
बैठक में बताया गया कि अगले छह महीनों में लोन प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। इसके बाद दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 से निर्माण कार्य शुरू हो सकता है।
सरकार की योजना है कि निर्माण कार्य को दो वर्षों के भीतर पूरा कर लिया जाए, ताकि जल्द से जल्द राज्यवासियों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके।
‘सेल्फ सस्टेनिंग मॉडल’ पर होगी अस्पताल की व्यवस्था
बैठक में रिम्स-2 को सेल्फ सस्टेनिंग मॉडल पर विकसित करने पर भी चर्चा हुई। इसके तहत अस्पताल की संचालन व्यवस्था को आर्थिक रूप से मजबूत और दीर्घकालिक बनाने की योजना पर विचार किया गया।
बैठक में लोन रेडीनेस, कंसल्टेंट चयन, फंड फ्लो मैनेजमेंट, फाइनेंशियल सस्टेनेबिलिटी, स्टाफिंग पैटर्न और तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से मंथन किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के उप सचिव ध्रुव प्रसाद, जेएसबीसीसीएल के अधिकारी और एडीबी प्रतिनिधि मौजूद रहे।

