
रांची : झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (JUVNL) में प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ के अध्यक्ष अजय राय ने निगम में स्थानांतरण आदेश की अनदेखी, फाइलों में कथित हस्तक्षेप और बैक-डेटिंग के जरिए आदेश जारी किए जाने की आशंका जताते हुए अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को शिकायत-सह-ज्ञापन सौंपा है। साथ ही पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। अजय राय ने कहा कि कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग, झारखंड सरकार की अधिसूचना संख्या-3193 दिनांक 22 मई 2026 के तहत तत्कालीन महाप्रबंधक (कार्मिक-सह-सामान्य प्रशासन) सुनील दत्त खाखा का स्थानांतरण दूसरे विभाग में किया जा चुका है।
ट्रांसफर के बाद भी हस्तक्षेप का आरोप
श्रमिक संघ का आरोप है कि स्थानांतरण के बावजूद यदि कोई अधिकारी पुराने पद से जुड़े प्रशासनिक, स्थापना, संविदा, पदस्थापन, सेवा संपुष्टि और अन्य संवेदनशील मामलों की फाइलों में दखल दे रहा है, तो यह बेहद गंभीर मामला है। अजय राय ने कहा कि ट्रांसफर के बाद भी किसी अधिकारी का पूर्व विभाग में प्रभाव बनाए रखना सेवा अनुशासन का उल्लंघन है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था और शासन प्रणाली दोनों पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि बैक-डेटिंग के आधार पर फाइलों का निष्पादन या आदेश जारी किए जा रहे हैं, तो इससे विभागीय रिकॉर्ड की वैधानिकता, पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
“प्रभाव और दबाव से चल रहा सिस्टम”
अजय राय ने आरोप लगाया कि JUVNL में लंबे समय से कुछ अधिकारी अपने प्रभाव और सत्ता का इस्तेमाल कर प्रशासनिक प्रक्रिया को प्रभावित करते रहे हैं। इससे निगम की कार्यसंस्कृति और संस्थागत विश्वसनीयता पर नकारात्मक असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी को स्थानांतरण के बाद भी “अनौपचारिक रूप” से काम करने दिया जा रहा है, तो यह पूरे प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही पर बड़ा सवाल है।
आंदोलन की चेतावनी
झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने साफ कहा है कि वह किसी भी तरह की प्रशासनिक अनियमितता, बैक-डेटिंग, फाइल मैनेजमेंट या प्रभाव आधारित फैसलों को बर्दाश्त नहीं करेगा। संघ ने चेतावनी दी है कि अगर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो राज्यव्यापी आंदोलन, जनहित अभियान और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संघ ने रखीं ये प्रमुख मांगें
संघ ने निगम प्रबंधन से कई मांगें भी रखी हैं। इनमें स्थानांतरण आदेश के बाद निष्पादित सभी फाइलों और आदेशों की जांच, बैक-डेटिंग और अनधिकृत हस्तक्षेप की स्वतंत्र जांच, संबंधित फाइलों को सुरक्षित रखने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई शामिल है। इसके अलावा निगम में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट प्रशासनिक दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है। अजय राय ने कहा कि यह मामला सिर्फ किसी एक अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि JUVNL की प्रशासनिक शुचिता, पारदर्शिता और जनता के भरोसे से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। ऐसे में निगम प्रबंधन को इस पर जल्द और कड़ा फैसला लेना चाहिए।

