
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक्शन प्लान तैयार कर फैक्ट्री को रिवाइव करने के दिए हैं निर्देश
फैक्ट्री के रिवाइवल के लिए बजट में किया गया है 5 करोड़ का प्रावधान
रांची : कांके की बेकन फैक्ट्री के अच्छे दिन आने वाले हैं। राज्य सरकार के प्रयासों से इसे नया जीवन मिलेगा। इस फैक्ट्री के रिवाइवल के लिए 12 मार्च को एमओयू साइन किया गया था। कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने इस फैक्ट्री के रिवाइवल की संभावनाएं तलाशने के लिए बीते वर्ष फरवरी में इसका दौरा किया था। इसके बाद सरकार की ओर से बजट में इसके रिवाइवल के लिए 5 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया था। दिलचस्प ये है कि आज जिस फैक्ट्री के रिवाइवल के लिए 5 करोड़ का प्रावधान किया गया है उसकी 1996 में ही करीब 25 हजार से मामूली गड़बड़ी दूर कर ली जाती तो ये फैक्ट्री चालू हालत में रहती।
रिवाइव करने का हर संभव प्रयास करुंगी
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने 11 फरवरी 2025 में इस फैक्ट्री का दौरा किया था, तब उन्होंने कहा था कि वे इस फैक्ट्री को पुनर्जीवित करने का हर संभव प्रयास करेंगी। इस फैक्ट्री के खुल जाने से शुकर पालन से जुड़े लोगों को फायदा होगा।
गौरवशाली रहा है बेकन फैक्ट्री का इतिहास
वर्ष 1996 के जनवरी तक बेकन फैक्ट्री का गौरवशाली इतिहास रहा रहा है। एकीकृत बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कृष्ण बल्लभ सहाय ने 23 अगस्त 1966 को बेकन फैक्ट्री का शिलान्यास किया था। 6 फरवरी 1972 को तत्कालीन राज्यपाल बिहार देवकांत बरुआ ने इसका उद्घाटन किया था। इस बेकन फैक्ट्री में सूकर मांस के विभिन्न प्रकार के रेडी टू इट व्यंजन बनाकर रैनबैक के नाम से ब्रांडिंग कर बिक्री की व्यवस्था थी। पहले इस फैक्ट्री से पूर्वोत्तर भारत के 7 राज्य असम, मेघालय, मणिपुर, सिक्किम, मिजोरम, त्रिपुरा और अरूणाचल प्रदेश तक रेडी टू ईट सूकर मांस व्यंजन की आपूर्ति की जाती थी। इन 7 राज्यों के अलावा यहां तैयार की गई पैकेज्ड रेडी टू इट बेकन पड़ोसी देश भूटान और नेपाल तक निर्यात किया जाता था। यह फैक्ट्री लगातार मुनाफे में रही। लेकिन वर्ष 1996 के जनवरी महीने के बाद से यहां उत्पादन शून्य है। यह फैक्ट्री वर्तमान में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है।

