कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक! आखिर कौन हैं प्रणव झा, जिन्हें झारखंड से राज्यसभा भेजने की तैयारी? जानिए इस भरोसेमंद चेहरे की पूरी कहानी

कांग्रेस ने झारखंड से राज्यसभा के लिए प्रणव झा पर दांव लगाया है। संगठन के भरोसेमंद चेहरे की राजनीतिक यात्रा, शिक्षा, पृष्ठभूमि और जीत के समीकरण जानिए।

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रांची: झारखंड की राजनीति में कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए ऐसा नाम सामने रख दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। पार्टी ने प्रणव झा को उम्मीदवार बनाकर कई नेताओं और राजनीतिक जानकारों को चौंका दिया है। लंबे समय से दिल्ली में कांग्रेस संगठन की जिम्मेदारियां संभाल रहे प्रणव झा को अब पार्टी नेतृत्व झारखंड से राज्यसभा भेजने की रणनीति पर काम कर रहा है। कांग्रेस ने ऐसे नेता पर भरोसा जताया है, जिसकी पहचान चुनावी राजनीति से ज्यादा संगठन के भीतर रणनीति बनाने वाले चेहरे के रूप में रही है। अब यदि वे संसद पहुंचते हैं तो राष्ट्रीय राजनीति में उनकी असली परीक्षा होगी।

जेएमएम, राजद और माले के समर्थन पर टिकी नजर

हालांकि राज्यसभा का रास्ता प्रणव झा के लिए पूरी तरह आसान नहीं माना जा रहा है। उनकी जीत के लिए जेएमएम, राजद और भाकपा-माले के 12 विधायकों का समर्थन महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा कांग्रेस के 16 विधायकों को एकजुट रखना भी पार्टी के सामने बड़ी चुनौती होगी। हालांकि 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में इंडिया गठबंधन के मौजूदा संख्या बल को देखते हुए उनकी जीत की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। शर्त सिर्फ इतनी है कि गठबंधन के भीतर एकजुटता बनी रहे और किसी तरह की टूट-फूट न हो।

चुनावी राजनीति से अलग पहचान

 कांग्रेस लंबे समय बाद ऐसे नेता को राज्यसभा भेजने की तैयारी में है, जिसकी पहचान मुख्य रूप से संगठन के भीतर काम करने वाले नेता की रही है। यदि वे निर्वाचित होते हैं तो संसद में कांग्रेस संगठन और झारखंड के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभा सकते हैं। प्रणव झा लंबे समय से कांग्रेस के केंद्रीय संगठन में सक्रिय हैं। वर्ष 2017 में उन्हें कांग्रेस के संचार विभाग में सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इससे पहले भी वे मीडिया कोऑर्डिनेटर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।

मल्लिकार्जुन खरगे के भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल

जब मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस अध्यक्ष बने तब उनके कार्यालय को मजबूत बनाने के लिए जिन चार नेताओं को विशेष समन्वयक नियुक्त किया गया था उनमें प्रणव झा भी शामिल थे। उनकी जिम्मेदारी कांग्रेस अध्यक्ष कार्यालय और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था। अगस्त 2024 में कांग्रेस के बड़े संगठनात्मक फेरबदल के दौरान प्रणव झा को एआईसीसी सचिव बनाया गया। इस नियुक्ति ने यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी नेतृत्व संगठन में उनकी भूमिका को लगातार बढ़ा रहा है।

शिक्षा और निजी जीवन

कांग्रेस सचिव प्रणव झा मूल रूप से बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव स्थित आनंदीपुर गांव के रहने वाले हैं। उनका बोकारो से भी गहरा संबंध बताया जाता है। वे कई मौकों पर वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ झारखंड आते रहे हैं और संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं। हालांकि मीडिया टीम का हिस्सा होने के बावजूद उन्होंने हमेशा खुद को राजनीतिक सुर्खियों से दूर रखने की कोशिश की।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर

प्रणव झा मूल रूप से भागलपुर जिले के कहलगांव के निवासी हैं, लेकिन उनका आवास बोकारो के सेक्टर-6 में स्थित है। उनकी शुरुआती और स्कूली शिक्षा बोकारो में ही हुई। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन के दौरान ही वे कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई से जुड़े और यहीं से उनकी सक्रिय राजनीतिक यात्रा की शुरुआत हुई। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। लगातार पार्टी के लिए काम करते रहे। राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने 1990 के दशक में बोकारो जिला युवा कांग्रेस से की थी। बाद में वे धनबाद संसदीय क्षेत्र में युवा कांग्रेस के प्रभारी समेत कई अहम पदों पर भी रहे।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।