वरुण धवन ने बताया स्टारडम और पहचान का असली मतलब

Manu Shrivastava
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वरुण धवन
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वरुण धवन ने अपने फिल्मी सफर में सफलता, असफलता और लगातार बदलते दर्शक वर्ग का सामना किया है। स्टार निर्देशक डेविड धवन के बेटे होने के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और दमदार फिल्मों के जरिए बॉलीवुड में अलग पहचान बनाई। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में वरुण ने स्टारडम, अभिनय और अपनी असली पहचान को बनाए रखने को लेकर खुलकर बातचीत की।

नकली छवि बनाकर ज्यादा दूर तक नहीं जाया जा सकता

उन्होंने कहा कि ग्लैमर की दुनिया में लंबे समय तक टिके रहने के लिए दिखावे से ज्यादा ईमानदारी जरूरी है। वरुण के अनुसार, करिअर के शुरुआती दौर में ही उन्हें एहसास हो गया था कि एक नकली छवि बनाकर ज्यादा दूर तक नहीं जाया जा सकता। इसलिए उन्होंने खुद को वैसा ही पेश करना शुरू किया, जैसे वे वास्तविक जीवन में हैं। उनका मानना है कि दर्शकों के साथ यही सच्चाई उन्हें लोगों के करीब लाती है।

शुरुआती दिनों में था परफेक्ट दिखने का दबाव

वरुण ने स्वीकार किया कि नए कलाकारों पर हमेशा एक आदर्श छवि बनाए रखने का दबाव रहता है। उन्होंने कहा कि करिअर की शुरुआत में वे भी इस सोच से प्रभावित थे कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। हर किसी को खुश रखने की कोशिश मानसिक दबाव पैदा करती है। हालांकि समय और अनुभव के साथ उन्होंने सीखा कि हर व्यक्ति को संतुष्ट करना संभव नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण अपने काम, मूल्यों और सिद्धांतों के प्रति ईमानदार रहना है।

अब कहानी और किरदार को देते हैं प्राथमिकता

फिल्मों के चयन को लेकर वरुण ने कहा कि अब उनकी सोच पहले से काफी बदल चुकी है। एक समय ऐसा था जब बॉक्स ऑफिस की सफलता सबसे बड़ी प्राथमिकता थी, लेकिन अब वे ऐसे प्रोजेक्ट चुनना पसंद करते हैं जो उन्हें एक अभिनेता के रूप में चुनौती दें। उन्होंने कहा कि वे उन निर्देशकों के साथ काम करना चाहते हैं जो उन्हें कम्फर्ट जोन से बाहर निकाल सकें। वरुण का मानना है कि बदलते सिनेमा के साथ खुद को विकसित करना ही असली स्टारडम की पहचान है।

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