
मनोज मिश्रा
सिंदरी के सभी लोगों (लीजधारक से लेकर झुग्गी झोपड़ी वाले तक) की हालत महाभारत के द्रोपदी जैसी है। कारण, उनके रक्षक वैसे पराक्रमी, बाहुबली, गुणवान, धैर्यशील, सत्यवादी धर्मराज पांडव हैं जिन्होंने पत्नी तक को दांव पर लगा दिया, वह भी बिना मर्जी जाने और किसी ने प्रतिकार तक नहीं किया। सिंदरी के लोगों को भी एफसीआइएल के रक्षक तो बेचा ही, इसके स्थानीय नेताओं ने भी बेच बेच कर अपना जेब भरा और भर रहे हैं। और प्रतिकार करने की साहस किसी में नहीं है। सिंदरी में बसे लोगों को 2029 तक उजाड़ दिया जाएगा और इसका खाका तैयार है। धीरे-धीरे धरातल पर दिखने लगा है। लोगों को बेहद शातिर तरीके से हटाया जा रहा है। उनके हक के तथ्य और कागजातों को या तो मिटा दिया गया या कुछ धूल फांक रहे हैं। और सिंदरी के रहनुमा लोग पूर्व इंप्लाईज बनकर पैसा ऐंठ रहे हैं और लोगों को बेच रहे हैं।
बीते दो सालों से शायद ही ऐसा किसी दिन होगा जब, एफसीआइएल आवास बेचने की चर्चा नहीं हुई हो। बीते दिनों ही भारी दबाव में एफसीआइएल ने कार्रवाई करते हुए अस्पताल के नजदीक रोहड़ाबांध इलाके के बीटी क्वाटर बेचने के मामले में रात को कार्रवाई की गई थी। एफसीआइएल सिंदरी प्रबंधन और होमगार्ड जवान ने चालीस हजार पर सौदा हुए बीटी आवास का खुलासा किया था। लेकिन, जिन आवासों को खुद एफसीआइएल के ही रखवाला बेच रहा हो उस पर कार्रवाई कौन करे?
यहां बड़ा बड़बोलेपन वाले मीडिया ब्रांड भी हैं जिनका काम है वसूली। क्योंकि बड़ा ब्रांड हैं लेकिन, शहर में फायरिंग हो, मारपीट हो, इलिगल एक्टिविटी हो तो इन्हें जानकारी नहीं होती। अखबार को भी बेच रहे हैं और अपनी रोटी सेक रहे हैं। उदाहरण अनेक हैं लेकिन चलिए आपको ताजा मामला बीते कल यानी गुरुवार की ही ले लिजिए। रंगामांटी इलाके के RMK4 आवासीय कॉलोनी के नजदीक रासाघुट्ट बस्ती और RML2 बस्ती सटा हुआ है। गुरुवार को दोपहर बस्ती के लोगों एवं दूसरे पक्ष के कथित बाहुबली के बीच इतना नोंकझोंक हुआ कि बलियापुर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। मारपीट की भी खबर है। बस्ती के लोग एकजुट होकर विरोध किया। मामला भी बड़ा दिलचस्प है लेकिन इस मामले को कभी और बताएंगे पर इतना बता देते हैं कि दिन के दोपहर की इस घटना को कवर करने ब्रांड मीडिया नहीं दिखा और ना ही अखबार के पन्नों में सुर्खियां बनी। स्थानीय मीडिया ब्रांड अगर सजग होता तो यह नौबत नहीं आता जो आज सिंदरी के लोगों के सामने है। ऐसे मीडिया ब्रांड अपने अखबार को लज्जित करते हैं और पत्रकारिता को वसूली का कारोबार बना लेते हैं। पुलिस भी इन्हें ही संरक्षण देती हैं और अपने मीडिया ग्रुप का एडमिन तक बना देता है इससे साफ है पुलिस भी चापलूस को रखना चाहती है जो उसके पक्ष में काम करे। इतना ही नहीं कॉरपोरेट जगत में भी इनकी पैठ मीडिया लाइजनर का होता है। और ऐसे ब्रांड अन्य मीडिया और उनके पत्रकारों का भी सौदा कर लेते हैं। इसके भी अनेक उदाहरण हैं।
लेकिन, बीते दस साल में इन ब्रांड का जनहित के के मुद्दे का एक खबर प्रमुखता से नहीं उठा। ये सिर्फ और सिर्फ अपने उन आकाओं का बयान प्रसारित करते रहे जहां दानापानी। हर्ल हो या सेल टासरा या फिर केटीएमपीएल या पावरमैक, सिंदरी में लगातार बिजली-पानी नहीं मिले…ब्रांड चुप..
तीसरी-चौथे क्लास में दोहा शिक्षकों ने रटवाया था, बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर, पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर सिंदरी के लोगों को ब्रांड वाले स्थानीय नेताओं से भी बचना है। ये वह ब्रांड हैं जिनका अपना कोई पहचान नहीं है। इनकी पहचान इनके आका से है और जब इनके आका ही आपके साथ हो जाएंगे तो इनकी क्या बिसात…जनप्रतिनिधि सभी का होता है और नगरवासियों को उनसे मिलने, उनसे फरियाद करने, उनसे सहायता मांगने का पूर्ण अधिकार है। इसके लिए किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं है। यह बिचौलिए ही आपको अबतक गुमराह करते आए हैं।
सिंदरी बुद्धिमानों का शहर है। इस शहर से पैदा हुए लोग देश के संवैधानिक संस्थाओं के सर्वोच्च पद तक टहुंचे हैं। सीबीआई के निदेशक पद पर आसीन हुए सिंदरी के बटे IAS सुबोध कुमार जयसवाल ने मुंबई में एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि वे उस छोटे से शहर सिंदरी से आते हैं जहां बच्चों का सपना इंजीनियर, डॉक्टर और वैज्ञानिक बनने का होता है। आज दुर्भाग्य है कि सिंदरी के लोग दबंगों के गुलाम हो गए हैं और सिंदरी को बेचने वाले को भगाने के बदले संरक्षण देते हुए महान बना रहे हैं।
जगने की जरूरत है, और एकता में बल। जैसे आज के नौजवान कह रहे हैं कि पुराने लोगों ने लड़ा नहीं, बेचा और सिंदरी का भविष्य बर्बाद कर दिया। ठीक वैसे ही आपको भी आने वाला भविष्य कोसेगा और पूछेगा आपने किया क्या? कहेगा आपने भी वही क्या जो बड़़े बुजुर्गों से हुआ। वक्त रहते सिंदरी नहीं जगा तो विनाश तय है। एसीसी अडानी सिमेंट बनते ही यहां भी सुखाड़ होने लगा है। विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 25 प्रतिशत वर्कर की छंटनी संभव है। लोकल.ठेकेदार को एकमुश्त हटा दिया गया है और कमाल की बात है इसमें बहुतेरे ठेकेदार भाजपा के लोग हैं, पर भाजपा चुप है। जिनकी काली कमाई की दुकान उजागर हो गई है वे बैचेन हैं, वह भी बैचेन हैं जिनका दानापानी बंद होने वाला है और साथ ही बैचेन हैं ब्रांड और मुखौटा..ये सब बंगाल के ममता दीदी की तरह धौंस जमा जरूर रहे हैं पर हकीकत है कि इनकी जड़ें हिल चुकी है और अगर सिंदरी के लोगों ने एकजुटता दिखाई तो पूरी तरह उखड़ सकता है। सच्चाई बहुत कुछ है.. फिर कभी।

