रांची: रिम्स के पूर्व निदेशक डॉ. राजकुमार का कार्यकाल विवादों के साये में रहा है, जहां स्वास्थ्य विभाग से टकराव से लेकर टेंडर और बेटे की नियुक्ति में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे। इस बीच 25 जून को उन्होंने डायरेक्टर के पद से इस्तीफा दे दिया। आइए इस दौरान क्या कुछ हुआ इसकी पूरी कहानी बताते हैं।

हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
रिम्स के निदेशक डॉ. राजकुमार और स्वास्थ्य विभाग के बीच का टकराव काफी समय से चर्चा में है। पिछले साल शासी परिषद की बैठक के दौरान एक एजेंडे को लेकर निदेशक और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के बीच तीखी बहस हुई थी। इस विवाद के बाद विभाग ने उन्हें पद से हटा दिया था, लेकिन डॉ. राजकुमार ने हार नहीं मानी और हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें दोबारा अपने पद पर बहाल किया गया था।
अपात्र कंपनी को सफाई का टेंडर
हाल ही में सीआईडी ने रिम्स में छापेमारी कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए और निदेशक से पूछताछ की। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर उत्तर प्रदेश की एक अयोग्य कंपनी को सफाई का टेंडर दिया गया और उसे जानबूझकर पात्र घोषित किया गया।
बेटे की अवैध नियुक्ति का मामला
डॉ. राजकुमार पर अपने बेटे को लाभ पहुंचाने के भी गंभीर आरोप लगाए गए थे। उनके बेटे ने रिम्स से ही ‘मास्टर्स इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन’ का कोर्स किया था। आरोप था कि कोई रिक्त पद न होने के बावजूद, एनाटॉमी विभाग के एक पद को बदलकर उनके बेटे की नियुक्ति की गई। बेटे की नियुक्ति का यह मामला जब हाई कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने संस्थान और विभाग की गलती मानते हुए अभ्यर्थी को ज्वाइन कराने का निर्देश दिया, क्योंकि इसमें छात्र का कोई दोष नहीं था। हालांकि, इस मामले की विभागीय जांच अभी भी जारी है। इसके अलावा छात्र रहने के दौरान ही निदेशक ने अपने बेटे को रिम्स की एक महत्वपूर्ण कमेटी का सदस्य भी बना दिया था, जिस पर लगातार सवाल उठ रहे थे।
जीबी मीटिंग में लाया गया था प्रस्ताव
स्वास्थ्य विभाग से कई बार रिम्स डायरेक्टर को पत्र भेजकर अलग अलग विषयों पर जवाब मांगा गया। लेकिन निदेशक की ओर से विभाग के पत्र का कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में पूर्व डायरेक्टर डॉ राजकुमार को हटाने संबंधी प्रस्ताव लाया गया था। हालांकि बैठक में इसपर चर्चा के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। लेकिन इसबार बार की जीबी बैठक में इसपर निर्णय लिया जाना था।


