अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा का ऐतिहासिक उद्घोष था संताल हूल : कल्पना सोरेन

हूल दिवस पर रांची के मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान में कल्पना सोरेन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को नमन किया।

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रांची : गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने मंगलवार को हूल दिवस के अवसर पर मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ हूल विद्रोह के महानायक अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर कल्पना ने कहा कि 30 जून 1855 को भोगनाडीह की धरती से उठी हूल की हुंकार केवल अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध एक विद्रोह नहीं थी, बल्कि जल, जंगल, जमीन, अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा का ऐतिहासिक उद्घोष थी। संताल समाज ने अन्याय और शोषण के विरुद्ध जिस साहस और संगठन के साथ संघर्ष किया, उसने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा और नई चेतना दी। यही कारण है कि हूल को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के शुरुआती और सबसे प्रेरणादायक जनआंदोलनों में गिना जाता है। हमारे लिए हूल केवल अतीत की स्मृति नहीं बल्कि अपनी पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा का जीवंत संदेश है। यह हमें सिखाता है कि अन्याय के सामने कभी झुकना नहीं है और न्याय, समानता तथा सम्मान के लिए सदैव एकजुट होकर खड़ा रहना है। अमर शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो सहित हूल आंदोलन के सभी वीर-वीरांगनाओं का त्याग और बलिदान सदैव हमारी प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।