
रांची: सदर अस्पताल रांची के डॉक्टरों ने एक बार फिर अपनी कुशलता का परिचय देते हुए एक गरीब महिला को नया जीवन दिया है। रांची के बुंडू आनेडीह की रहने वाली सुलोचना देवी काफी लंबे समय से पेट दर्द, भारीपन और कमजोरी से पीड़ित थीं। इसके बाद सदर अस्पताल के सर्जरी विभाग ने लैप्रोस्कोपिक (दूरबीन) विधि से उनकी सफल सर्जरी कर राहत पहुंचाई है। सुलोचना देवी ने अपनी बीमारी के इलाज के लिए कई डॉक्टरों और अस्पतालों के चक्कर काटे। जांच के दौरान उनकी तिल्ली (Spleen) का आकार बेहद बढ़ा हुआ पाया गया था। कुछ अस्पतालों में तो उन्हें खून की गंभीर बीमारी या कैंसर होने का भी शक जताया गया था, जिससे परिवार काफी चिंतित था। जब वे सदर अस्पताल रांची के सर्जरी विभाग पहुंचीं, तो डॉक्टरों ने पाया कि उनमें खून की अत्यधिक कमी थी और हीमोग्लोबिन घटकर महज 5 gm/dl के आसपास रह गया था। स्थिति इतनी गंभीर थी कि खून चढ़ाने के कुछ ही दिनों बाद हीमोग्लोबिन का स्तर फिर से गिर जाता था। रिम्स की MRI रिपोर्ट में उनकी तिल्ली का साइज 26*16 सेमी पाया गया था।
ऑन्कोलॉजी विभाग की सलाह पर हुई सर्जरी
मरीज की जटिल स्थिति को देखते हुए ऑन्कोलॉजी (कैंसर) विभाग के डॉक्टरों से भी परामर्श लिया गया। उन्होंने जल्द से जल्द तिल्ली को निकालने और उसकी बायोप्सी कराने की सलाह दी। इसके बाद 15 जून को सदर अस्पताल के सर्जरी विभाग ने लैप्रोस्कोपिक विधि से महिला का सफल ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद जब तिल्ली को मापा गया, तो उसका वजन करीब 1.45 किलोग्राम और साइज 18*16 सेमी निकला। डॉक्टरों के इस सफल प्रयास से मरीज का हीमोग्लोबिन स्तर सुधरकर अब 11 हो गया है। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद आज मरीज को अस्पताल से सकुशल छुट्टी दे दी गई है।
आयुष्मान से मिला मुफ्त इलाज
एक छोटे किसान होने के नाते मृत्युंजय महतो के लिए इस बड़े ऑपरेशन का खर्च उठाना बेहद मुश्किल था, लेकिन ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ के तहत यह जटिल ऑपरेशन पूरी तरह से निःशुल्क किया गया। टीम में मुख्य रूप से डॉ अजीत कुमार, एनेस्थेटिस्ट डॉ. वसुधा, डॉ. प्रवीण, सिस्टर इन-चार्ज नेली, ओटी असिस्टेंट संदीप, संतोष, सृष्टि, सरिता, संजू व अन्य शामिल थे। समस्त ओटी (OT) टीम। इस उपलब्धि पर सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार और उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश सिंह ने ऑपरेशन करने वाली पूरी मेडिकल टीम को बधाई दी है।

