
अयोध्या : अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने रविवार को दावा किया कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को कोई शिकायत नहीं है और उन्हें यहां दर्शन करके अच्छा लग रहा है। मिश्रा ने अयोध्या में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “अगर आप अंगद टीला और सुग्रीव किला के पास श्रद्धालुओं से पूछें कि उन्हें क्या अंतर महसूस हो रहा है, क्या उनके मन में कोई अलग भावना है? तो मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि भगवान राम में उनकी आस्था, मंदिर में की गई व्यवस्थाओं और यहां होने वाली भगवान राम की पूजा को लेकर उनकी कोई शिकायत नहीं है।”
मिश्रा ने कहा, “लोगों से पूछने पर बस एक ही जवाब मिलता है कि भगवान के मंदिर आने से बेहतर और क्या हो सकता है?”
राम मंदिर में विशेष कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की संभावित नियुक्ति और उसकी भूमिका के बारे में पूछे जाने पर मिश्रा ने कहा कि जैसा कि सीईओ पद का नाम बताता है, यह व्यक्ति ट्रस्ट के तहत प्रबंधन से जुड़े कार्यों की देखरेख करेगा। मिश्रा ने कहा, “सीईओ को कौन से अधिकार दिए जाएंगे यह तय करना ट्रस्ट पर निर्भर करता है। सीईओ अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की व्यवस्था करेगा, लेकिन सब कुछ ट्रस्ट के अधीन ही रहेगा।”
उन्होंने कहा कि वह राम मंदिर के सीईओ की भर्ती प्रक्रिया के लिए बुलाई गई बैठक में “कभी शामिल नहीं” होंगे।
राम मंदिर ट्रस्ट में संभावित बदलाव के सवाल पर मिश्रा ने कहा, “मेरी उपस्थिति में कोई निर्णय नहीं लिया गया।” उन्होंने साफ किया कि वह राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई को आयोजित बैठक में शामिल नहीं हुए थे। यह पूछे जाने पर कि क्या वह राम मंदिर ट्रस्ट की 22 जुलाई की बैठक में हिस्सा लेंगे, मिश्रा ने कहा, “बैठक 22 जुलाई को है, लेकिन मुझे बैठक का एजेंडा नहीं पता। अगर मामला निर्माण से जुड़ा है, तो मुझे इसमें शामिल होने के लिए आना होगा।”
उन्होंने कहा, “ कृपया समझने की कोशिश करें। हम पदेन सदस्य हैं, जिन्हें वोट देने का कोई अधिकार नहीं है। अब 22 जुलाई की बैठक का एजेंडा जानने के बाद ही मैं तय करूंगा कि उसमें शामिल होना है या नहीं।” आगामी 22 जुलाई की बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हो सकती है, इस बारे में मिश्रा ने कहा कि यह सवाल मंदिर ट्रस्ट के महासचिव से पूछा जाना चाहिए।

