
रांची : स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच मुक्त घोषित किए जाने के बावजूद राजधानी रांची के कई इलाकों में ओपेन यूरिनेशन का सिलसिला थम नहीं रहा है। इस स्थिति ने रांची नगर निगम के एनफोर्समेंट टीम और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बता दें कि झारखंड के शहरी स्थानीय निकायों ने 2018 में ओडीएफ दर्जा हासिल किया था, जबकि रांची को 2 अक्टूबर 2017 को ही ओडीएफ घोषित कर दिया गया था। रांची नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, शहर में फिलहाल 68 सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालय, 175 मॉड्यूलर टॉयलेट और 4 एरोबिक बायो टॉयलेट को मिलाकर कुल 247 टॉयलेट मौजूद हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या अब केवल शौचालयों की उपलब्धता की नहीं है, बल्कि उनके उचित रखरखाव, उपयोग और नियमों के कड़ाई से पालन की है।
शहर के प्रमुख हॉट स्पॉट
शहर की कई मुख्य सड़कों, खाली प्लॉटों और नदी तटों पर ओपेन यूरिनेशन करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से रेडिसन ब्लू होटल के सामने की सड़क, कोतवाली थाने के सामने का क्षेत्र, खादगड़ा सब्जी मंडी के पास, कचहरी चौक के पास सर्कुलर रोड, बिरसा मुंडा बस टर्मिनल शामिल है।
खादगड़ा सब्जी मंडी के पास रहने वाले सूरज कुमार ने बताया कि कागजों पर कई शौचालय बने हुए हैं, लेकिन रोज उन्हीं जगहों पर लोग खुले में पेशाब करते हैं। नगर निगम प्रशासन द्वारा कोई सख्त कार्रवाई या जुर्माना नहीं लगाया जाता। ऐसी स्थिति में प्रशासन ODF होने का दावा कैसे कर सकता है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस वाले भी सार्वजनिक स्थानों पर खुले में पेशाब करते देखे गए हैं। रेडिसन ब्लू के पास रहने वाले एक नागरिक ने कहा कि जब कानून लागू कराने वाले ही स्वच्छता नियमों का उल्लंघन करेंगे, तो आम जनता से पालन की उम्मीद कैसे की जा सकती है? कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए।
सार्वजनिक स्वच्छता बनाए रखना और शौचालयों का प्रबंधन रांची नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसपर आरएमसी अधिकारियों ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमित रूप से अभियान चलाया जा रहा है। एक अधिकारी के अनुसार, नगर निगम अधिनियम के तहत खुले में पेशाब करने पर 100 रुपये से जुर्माना शुरू होता है और उल्लंघन करते हुए पकड़े जाने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है।

