
बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्मों में अपनी पहचान बना चुकी अभिनेत्री अंजना सुखानी ने हाल ही में हिंदी और क्षेत्रीय सिनेमा के बीच के अंतर पर खुलकर बात की। अभिनेत्री का कहना है कि अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों में काम करने का अनुभव उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने खुद को सौभाग्यशाली बताया कि उन्हें हिंदी के अलावा पंजाबी, तेलुगू, मराठी, कन्नड़, मलयालम और अन्य भाषाओं की फिल्मों में भी अभिनय करने का अवसर मिला।
हिंदी और रीजनल सिनेमा की अलग पहचान
अंजना सुखानी के अनुसार, हिंदी फिल्मों और क्षेत्रीय सिनेमा की स्टोरीटेलिंग शैली में स्पष्ट अंतर देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि हिंदी सिनेमा आमतौर पर पूरे भारत के दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाया जाता है, जबकि क्षेत्रीय फिल्में स्थानीय संस्कृति, भाषा, परंपराओं और जीवनशैली से गहराई से जुड़ी होती हैं। यही वजह है कि हर फिल्म उद्योग की अपनी अलग पहचान और प्रस्तुति शैली होती है।
भारत की विविधता को बताया सबसे बड़ी खूबसूरती
अभिनेत्री ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। अलग-अलग राज्यों की भाषा, खान-पान, रीति-रिवाज और कहानी कहने का तरीका फिल्मों में भी दिखाई देता है। उनके अनुसार, यही विविधता भारतीय सिनेमा को समृद्ध और अनूठा बनाती है। एक कलाकार के रूप में उन्हें विभिन्न संस्कृतियों को करीब से समझने और उनके अनुरूप काम करने का अवसर मिला है।
नई फिल्म में निभाया अहम किरदार
अंजना सुखानी हाल ही में निर्देशक इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में नजर आई हैं। फिल्म में उन्होंने मेहर नाम का एक महत्वपूर्ण किरदार निभाया है। उनके अधिकांश दृश्य दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के साथ हैं, जिसे उन्होंने एक यादगार अनुभव बताया।
विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित भावुक कहानी
फिल्म ‘मैें वापस आऊंगा’ 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसमें बिछड़े प्रेम, परिवार और यादों की भावनात्मक कहानी को आधुनिक समय से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ, शरवरी, वेदांग रैना, बनिता संधू, रजत कपूर और संजय सूरी भी अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं।

