
डेस्क: प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर सख्ती दिखाते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। नए प्रस्ताव के तहत पेपर लीक जैसे मामलों में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ पहले से कहीं अधिक कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पेपर लीक मामले में दोषी पाया जाता है तो उसे अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इतना ही नहीं, संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले गिरोहों और पूरे नेटवर्क पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सोमवार को संसद में पेश हो सकता है संशोधन विधेयक
विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगी। सरकार का लक्ष्य है कि इन मामलों का फैसला तीन महीने के भीतर किया जाए, ताकि परीक्षा से जुड़े अपराधों का जल्द निपटारा हो सके। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सोमवार को इस संशोधन विधेयक को संसद में पेश कर सकते हैं। सरकार का कहना है कि इस नए कानून का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाना, पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत करना है।

