रिम्स सुपर स्पेशलिटी विंग में लिफ्ट खराब होने से गंभीर मरीज परेशान, रैंप से ट्रॉली खींचने को मजबूर परिजन

रिम्स रांची के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में लिफ्ट बंद होने से मरीजों और परिजनों की परेशानी बढ़ गई है। ट्रॉली से रैंप पर मरीजों को ले जाने की मजबूरी बनी हुई है।

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रांची: राज्य के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल रिम्स में व्यवस्था सुधारने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन मरीजों की परेशानी कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। हालात ये है कि लिफ्ट होने के बावजूद रैंप के सहारे मरीजों की ट्रॉली खींचनी पड़ रही है। जिससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। आखिर हो भी क्यों ना सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक की लिफ्ट बंद पड़ी है। इसके बावजूद रिम्स प्रबंधन का ध्यान इस ओर नहीं है। ऐसे में समझा जा सकता है कि हॉस्पिटल प्रबंधन मरीजों की परेशानी को लेकर कितना गंभीर है।

लाखों रुपए खर्च किए जाते है मेंटेनेंस पर

सुपरस्पेशलिटी ब्लॉक में लिफ्ट के मेंटेनेंस के नाम पर हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। यहां की बड़ी लिफ्ट काफी समय से बंद पड़ी है, जिसके कारण अस्पताल में इलाज कराने आ रहे मरीजों और उनके परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लिफ्ट की सुविधा न मिलने की वजह से दिल और किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मरीजों को बेहद परेशानी झेलनी पड़ रही है। लिफ्ट बंद होने से मरीजों को रैंप या सीढ़ी के सहारे ले जाना पड़ता है। हालांकि दूसरी तरफ लगे छोटे लिफ्ट चालू है। लेकिन उसमें ट्रॉली के लायक जगह नहीं है। ऐसे में चलने फिरने वाले मरीजों को थोड़ी राहत है। सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में दो बड़े लिफ्ट है। लेकिन दोनों ही लिफ्ट के बाहर सेकंड फ्लोर पर बोलार्ड लगा दिए गए है। साथ ही एक नोटिस बोर्ड भी लगा है। जिसमें लिखा है कि लिफ्ट पिट में पानी भर जाने के कारण लिफ्ट का संचालन नहीं हो पा रहा है। इसके मरम्मत का काम चल रहा है। मरीजों को असुविधा के लिए खेद है।

चालू कराने की मांग

अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही का खमियाजा मरीजों के परिजनों को भुगतना पड़ रहा है। मजबूरी में परिजन अपने गंभीर रूप से बीमार मरीजों को ट्रॉली पर बैठाकर रैंप के सहारे ऊपरी मंजिलों तक ले जाने को विवश हैं। एक तरफ जहां हर माह लिफ्ट के रखरखाव और मेंटेनेंस पर भारी-भरकम राशि पानी की तरह बहाई जाती है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि आपातकालीन स्थिति में भी मरीजों को लिफ्ट की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इस लचर व्यवस्था को लेकर मरीजों के परिजनों में भारी आक्रोश है और वे जल्द से जल्द लिफ्ट दुरुस्त कराने की मांग कर रहे हैं। इस मामले में रिम्स के पीआरओ डॉ शिशिर कुमार ने कहा कि छोटे लिफ्ट तो चालू है। कुछ में तकनीकी समस्या है जिसे बंद रखा गया है। जहां तक रैंप से ट्रॉली पर मरीजों को ले जाने की की बात है तो इसे देखा जाएगा। जल्द ही बंद पड़े लिफ्ट को चालू कराया जाएगा।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।