रांची: राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) को किडनी ट्रांसप्लांट का लाइसेंस मिले सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इसके लिए जरूरी आधारभूत संरचना तैयार नहीं हो सकी है। अस्पताल में न तो किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट, न ही विशेष ऑपरेशन थियेटर (ओटी) और आईसीयू बनकर तैयार हुआ है। यही नहीं, डॉक्टर, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की ट्रेनिंग प्रक्रिया भी अब तक पूरी नहीं की जा सकी है।

रिम्स में ट्रॉमा सेंटर के भीतर ओटी तैयार करने का प्रस्ताव फिलहाल कागजी कार्रवाइयों और कमेटियों के फेर में अटका हुआ है। इसके विपरीत, इसी साल जनवरी 2026 में लाइसेंस पाने वाले निजी ‘राज अस्पताल’ ने अपनी यूनिट, ओटी और डॉक्टरों की टीम की ट्रेनिंग तक पूरी कर ली है। रिम्स में देरी की वजह से झारखंड के लगभग 27 पंजीकृत मरीज सरकारी सेवा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं और कई मरीजों को मजबूरन राज्य के बाहर इलाज कराने जाना पड़ रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में हर 10 में से एक व्यक्ति किडनी बीमारी से पीड़ित है और मरीजों की संख्या 35 लाख से अधिक है। इनमें से 8 से 10 फीसदी मरीजों को डायलिसिस की जरूरत होती है। नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (NOTTO) के पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार, झारखंड के 27 मरीज वर्तमान में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए वेटिंग लिस्ट में हैं। इस मामले पर रिम्स के पीआरओ डॉ. शिशिर कुमार ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में जगह चिह्नित कर ली गई है और गठित कमेटी के सुझावों के आधार पर भवन निर्माण विभाग को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। एसओपी तैयार है और जल्द ही सुविधाएं शुरू करने की उम्मीद है।


