रांची: जेपीएससी की 11वीं प्रारंभिक परीक्षा में हुई गड़बड़ी और अनियमितताओं की जांच कर रही सीआईडी को गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि परीक्षा में सेंधमारी के लिए बनाए गए पूरे नेटवर्क में मुख्य आरोपी अभय तिवारी के साथ उसका भरोसेमंद बिजनेस पार्टनर उमेश कुमार महतो भी सक्रिय भूमिका निभा रहा था। उमेश नामकुम के तेतरी टोली का रहने वाला है, जबकि अभय ने भी नामकुम के जोरार में अपना मकान बना रखा था।

सीआईडी द्वारा अदालत के समक्ष दी गई जानकारी के अनुसार, अभ्यर्थियों से कथित तौर पर अवैध रूप से वसूली गई रकम, एजेंटों के कमीशन और हिस्सेदारी के बंटवारे का पूरा वित्तीय हिसाब-किताब रांची स्थित ‘सागर पैलेस’ से संचालित होता था। उमेश ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया है कि अभ्यर्थियों से वसूली गई पूरी रकम में सभी शामिल लोगों का हिस्सा पहले से तय था और वसूली के बाद रकम का बंटवारा किया जाता था। इतना ही नहीं, परीक्षा के लिए एक अभ्यर्थी लाने पर बिचौलियों या एजेंटों को 5 लाख रुपये तक का कमीशन दिए जाने की बात भी सामने आई है।
सीआईडी के मुताबिक उमेश और एक अन्य आरोपी रमेश ने बिचौलियों का काम करते हुए अभ्यर्थियों से लगभग 1.10 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की थी। दोनों आरोपियों ने पूछताछ में रकम वसूलने और उसे अभय तिवारी तक पहुंचाने का जुर्म स्वीकार कर लिया है। जांच एजेंसी को अभय तिवारी और नेटवर्क के अन्य सदस्यों के बीच कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के अहम लिंकेज भी मिले हैं। इसके अलावा मामले में जब्त किए गए डिजिटल साक्ष्यों को साइबर सेल के मुख्य तकनीकी अधिकारी से प्रमाणित कराने की प्रक्रिया चल रही है।


