
योगेंद्र यादव
कुछ लोग हमारे जीवन में केवल आते नहीं हैं, बल्कि हमारी पूरी जीवन की दिशा बदल देते शामनद बसीर मेरे लिए ऐसे ही व्यक्तित्व थे। मेरी परिस्थितियां आसान नहीं थीं। एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्र के लिए कानून की प्रतिष्ठित शिक्षा तक पहुंचना लगभग असंभव-सा था। लेकिन IDIA- Increasing Diversity by Increasing Access to Legal Education के माध्यम से मुझे वह अवसर मिला, जिसने न केवल मेरी शिक्षा बदली, बल्कि मेरे जीवन का उद्देश्य भी बदल दिया।
इस यात्रा में शामनद सर केवल आइडिया के संस्थापक या मेरे मेंटर नहीं थे; उन्होंने मुझे यह विश्वास दिया कि प्रतिभा किसी विशेष वर्ग, शहर या आर्थिक पृष्ठभूमि की मोहताज नहीं होती, जरूरत सिर्फ अवसर और सही मार्गदर्शन की होती है।
उन्होंने हमें कानून को केवल एक प्रोफेशन के रूप में नहीं, बल्कि समाज में बदलाव और न्याय के साधन के रूप में देखना सिखाया। उन्होंने यह समझाया कि एक वकील की सफलता केवल अदालत में जीतने में नहीं, बल्कि उन लोगों की आवाज बनने में है जिनकी आवाज अक्सर व्यवस्था तक पहुंच ही नहीं पाती।
आज जब मैं वकालत के पेशे में हूं, तो मेरी कानूनी यात्रा के पीछे शामनद सर की दी हुई वह दृष्टि कहीं न कहीं हमेशा मौजूद रहती है। उन्होंने मेरे जैसे अनेक छात्रों को केवल कानून पढ़ने का अवसर नहीं दिया—उन्होंने हमें अपने सपनों पर विश्वास करने का साहस दिया। आज भी जब किसी वंचित पृष्ठभूमि के युवा को आगे बढ़ते देखता हूं, तो लगता है कि शामनद का सपना आगे बढ़ रहा है। सर, आप हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आपकी सोच, आपकी संस्था और आपने जिन जीवनों को बदला, उनमें आप हमेशा जीवित रहेंगे। आपने मुझे सिर्फ़ एक करियर नहीं दिया, बल्कि मेरे जीवन को एक उद्देश्य दिया।
आपकी स्मृति को नमन।
आपके सपने को आगे बढ़ाना ही आपके प्रति मेरी सच्ची श्रद्धांजलि है।
लेखक रांची हाई कोर्ट में वकील हैं।

