- बारिश के दौरान छत से लगातार रिसता है पानी, पंचायत के उपकरण भी हो रहे खराब; मुखिया ने जताई बड़ी दुर्घटना की आशंका
महुआडांड़: महुआडांड़ पंचायत भवन इन दिनों जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। सोमवार को पंचायत भवन की छत का प्लास्टर अचानक गिर गया। राहत की बात यह रही कि जिस समय प्लास्टर गिरा, वहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया। हालांकि घटना के बाद पंचायत भवन में काम करने वाले कर्मियों और आने वाले ग्रामीणों में भय का माहौल है।

बताया जाता है कि महुआडांड़ पंचायत भवन की छत लंबे समय से जर्जर स्थिति में है। बारिश के दिनों में छत पर पानी जमा हो जाता है और पानी रिसकर भवन के अंदर आने लगता है। लगातार पानी के रिसाव के कारण छत का प्लास्टर कमजोर हो गया है। इसी क्रम में सोमवार को छत का एक हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर गया।
दूसरे तल्ले का निर्माण नहीं होने से बढ़ी परेशानी

इस संबंध में महुआडांड़ पंचायत की मुखिया प्रमिला मिंज ने बताया कि पंचायत भवन के दूसरे तल्ले का निर्माण नहीं हो सका है। इसके कारण बारिश का पानी सीधे छत पर जमा हो जाता है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण हर बारिश में छत से पानी चूने लगता है। लंबे समय से पानी के रिसाव के कारण पंचायत भवन की स्थिति अत्यंत जर्जर हो गई है।
मुखिया ने बताया कि पंचायत भवन में पंचायत से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य संचालित होते हैं। भवन में रखे लैपटॉप समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी छत से पानी चूने के कारण खराब हो रहे हैं। इससे सरकारी कार्य प्रभावित होने के साथ-साथ सरकारी संपत्ति के नुकसान की भी आशंका बनी हुई है।
कभी भी हो सकती है बड़ी दुर्घटना
पंचायत भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए यहां कभी भी बड़ी दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है। छत का प्लास्टर गिरने की घटना के बाद यह खतरा और बढ़ गया है। पंचायत भवन में प्रतिदिन ग्रामीण विभिन्न कार्यों को लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में यदि छत का कोई बड़ा हिस्सा अचानक गिर जाता है तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है।
ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से पंचायत भवन की तत्काल जांच कराने तथा जर्जर हिस्से की मरम्मत कराने की मांग की है। साथ ही छत पर बारिश का पानी जमा न हो, इसके लिए जल निकासी की समुचित व्यवस्था कराने की भी मांग की गई है।
लोगों का कहना है कि किसी बड़े हादसे के बाद मरम्मत कराने के बजाय समय रहते पंचायत भवन की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि पंचायत कर्मियों और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।


