
रांची: जल संरक्षण, आधुनिक तकनीक और सामुदायिक सहभागिता को मजबूत बनाना सतत कृषि की आधारशिला है। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को जलवायु अनुकूल बनाने के लिए जल एवं मृदा संरक्षण योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। इसी उद्देश्य से जेएमटीटीसी भवन में भूमि संरक्षण निदेशालय की ओरसे आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुईं।
कार्यशाला में मंत्री ने भूमि संरक्षण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभागीय योजनाओं का लाभ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका वास्तविक प्रभाव खेतों और किसानों तक दिखाई देना चाहिए।
मंत्री ने तालाब, पर्कोलेशन टैंक (PT), डीप बोरिंग और BPCD जैसी योजनाओं के स्थल चयन एवं पहचान की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आवंटन जारी हो चुका है, इसलिए पिछले वर्ष की देनदारियों एवं बकाया भुगतान को अगस्त के अंत तक अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। वर्ष 2025-26 के तहत रिपोर्ट की गई देनदारियों से संबंधित कार्य भी निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने का निर्देश देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्य पूरा नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारी सीधे जवाबदेह होंगे।
मंत्री ने कहा कि वास्तविक मृदा संरक्षण कार्य सामान्यतः अक्टूबर के बाद शुरू होते हैं और विभाग के पास प्रभावी रूप से केवल चार से पांच महीने का कार्यकाल रहता है। ऐसे में उपलब्ध मानव संसाधन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए विभाग ठोस कार्ययोजना तैयार करे।
SMAM में 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का निर्देश
कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन SMAM की समीक्षा करते हुए मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस वर्ष लक्ष्य प्राप्ति में किसी भी प्रकार का बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज से ही ऐसी कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा सके।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि पिछले वर्ष प्राप्त आवेदनों को केवल इसलिए निरस्त न किया जाए कि वे उस वर्ष स्वीकृत नहीं हो सके। पात्र आवेदनों पर चालू वित्तीय वर्ष में भी नियमानुसार विचार किया जाए।
तालाब जीर्णोद्धार में जनप्रतिनिधियों से समन्वय
तालाब जीर्णोद्धार योजना के संबंध में मंत्री ने पिछले वर्ष की अनुशंसाओं को भी शामिल करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसी अनुशंसा को लेकर भ्रम या संशय की स्थिति में संबंधित विधायक को सूचित कर उनसे समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि जनप्रतिनिधियों की अनुशंसाओं पर उचित विचार हो सके।
मंत्री ने 15 अगस्त के बाद सभी जिलों में जिला परिषद सदस्यों, प्रमुख, मुखिया एवं अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए कार्यशालाएं आयोजित करने का निर्देश दिया, ताकि राज्य स्तरीय कार्यशाला में हुई चर्चा और योजनाओं की जानकारी उन्हें दी जा सके।
पिछले पांच वर्षों की योजनाओं का होगा Social Impact Study
मंत्री ने प्रत्येक जिले को पिछले पांच वर्षों में निष्पादित भूमि संरक्षण योजनाओं का Social Impact Study कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसी योजना की सफलता केवल निर्माण पूरा होने से नहीं, बल्कि उससे किसानों और ग्रामीण समुदाय के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव से तय होगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कृषक मित्र, VLW सहित स्थानीय स्तर के कर्मियों के माध्यम से लाभुक समितियों से सीधा संवाद स्थापित किया जाए और योजनाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त की जाए।
साथ ही, मंत्री ने भूमि संरक्षण निदेशालय को पिछले पांच वर्षों में किए गए कार्यों का पूरा एवं अद्यतन डाटा विभागीय वेबसाइट पर दर्ज करने का निर्देश दिया, ताकि योजनाओं की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो और पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
राज्य स्तरीय डैशबोर्ड और जीओ-टैगिंग से होगी निगरानी
भूमि संरक्षण योजनाओं की पारदर्शी एवं प्रभावी निगरानी के लिए राज्य स्तर पर डैशबोर्ड विकसित करने की बात कहते हुए मंत्री ने कहा कि प्रत्येक योजना का विवरण जीओ-टैग्ड तस्वीरों के माध्यम से दर्ज किया जाएगा। इससे योजनाओं की प्रगति की वास्तविक समय में निगरानी और समीक्षा संभव होगी।
उन्होंने प्रत्येक जिला भूमि संरक्षण अधिकारी (DSCO/SCO) को अपने जिला कार्यालय में लाभुक समितियों की कार्यशाला आयोजित करने का निर्देश दिया। साथ ही, निर्मित जल संरचनाओं के आसपास सामूहिक खेती (Group Farming) को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया, ताकि जल संरक्षण के साथ कृषि उत्पादन और किसानों की आय में भी वृद्धि हो।
कृषि यंत्रीकरण को जरूरत के अनुरूप बनाने पर जोर
मंत्री ने सभी जिलों को कृषि उपकरणों की वर्तमान सूची की समीक्षा करने तथा स्थानीय जरूरत के अनुरूप नए उपकरण जोड़ने अथवा अनुपयोगी उपकरणों को हटाने संबंधी सुझाव देने का निर्देश दिया।
BPCD के संबंध में स्पष्ट समय-सीमा तय करते हुए उन्होंने कहा कि अगले 15 दिनों के भीतर स्थल चयन एवं प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कर प्रस्ताव निदेशालय को उपलब्ध कराया जाए।
कार्यशाला के समापन पर प्रत्येक जिले को भूमि संरक्षण योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए अपने सुझाव एवं अनुशंसाएं लिखित रूप में श्वेत पत्र (White Paper) के माध्यम से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
तीन महिला समूहों को वितरित किए गए ट्रैक्टर
कार्यशाला के अवसर पर तीन लाभुक महिला समूहों के बीच ट्रैक्टर का वितरण भी किया गया। मंत्री ने कहा कि कृषि यंत्रीकरण के माध्यम से महिला समूहों और किसानों को सशक्त बनाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
इस अवसर पर विभागीय सचिव अबूबकर सिद्दीक़, भूमि संरक्षण निदेशक विकास कुमार सहित विभाग के वरीय अधिकारी एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

