विजयन ने खनन संशोधन विधेयक की आलोचना की, संघीय सिद्धांतों का उल्लंघन करार दिया

Archana Ekka
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तिरूवनंतपुरम : केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने शुक्रवार को केंद्र के खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि यह विधेयक संविधान के संघीय सिद्धांतों का उल्लंघन करता है और खनिज संसाधनों पर राज्यों के अधिकारों को कमजोर करता है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य राज्य सरकारों को खनन अधिकारों और खनिज संसाधनों वाली भूमि पर अतिरिक्त कर या उपकर लगाने से रोकना है। उन्होंने इसे राज्यों के हितों में ‘‘हस्तक्षेप’’ करार दिया। उन्होंने कहा कि भूमि और उसके संसाधन संविधान की सातवीं अनुसूची की प्रविष्टि 18 के तहत ‘राज्य सूची’ के विषय हैं और आरोप लगाया कि उन पर केंद्र का नियंत्रण संविधान का उल्लंघन है।

विजयन ने केरल की संयुक्त लेाकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार से कहा कि वह संशोधित प्रावधानों के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख करे, क्योंकि उनके अनुसार ये प्रावधान संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, ‘‘सवाल यह है कि क्या केरल सरकार संघवाद और राज्यों के अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र के खिलाफ रुख अख्तियार करने के लिए तैयार है?’’ विजयन ने यह आरोप भी लगाया कि यह संशोधन केंद्र की उस ‘‘साजिश’’ का हिस्सा है, जिसके तहत देश के बहुमूल्य खनिज संसाधनों को निजी एकाधिकार वाली कंपनियों को सौंपा जाना है। उनके अनुसार, इस संशोधन का उद्देश्य रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दुर्लभ खनिजों के खनन को निजी क्षेत्र के लिए खोलना है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर करना और कॉरपोरेट कंपनियों को भारी मुनाफा कमाने में मदद करना है।

उन्होंने विधेयक का जोरदार विरोध करने का आह्वान किया। विजयन ने केरल की यूडीएफ सरकार पर केंद्र की निजीकरण नीतियों का ‘‘समर्थन’’ करने का भी आरोप लगाया। विजयन ने कथित निजीकरण के एजेंडे को केरल के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ‘केरल मिनरल्स एंड मेटल्स लिमिटेड’ (केएमएमएल) को कमजोर करने की कोशिशों से भी जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि केएमएमएल को निजी कंपनियों से अधिक कीमतों पर अपनी मासिक जरूरत से दोगुने से भी ज्यादा कच्चा माल खरीदने के लिए मजबूर करना संदिग्ध है। विजयन ने कहा, ‘‘जो संस्थान खुद खनन कर सकता है और मुनाफे में चल सकता है, उसका गला घोंटा जा रहा है ताकि निजी एकाधिकार वाली कंपनियों को भारी लाभ कमाने का मौका मिल सके।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि केएमएमएल को धीरे-धीरे बंद करके उसकी जगह निजी कंपनियों को लाने की एक सोची-समझी चाल है। उन्होंने कहा कि ऐसी कोशिशों का विरोध किया जाना चाहिए।
हाल ही में, मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कहा था कि राज्य सरकार संशोधन विधेयक का विरोध करेगी।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।