

बुंडू: रोजगार की तलाश में चेन्नई जा रहे बुंडू के बेसराडीह निवासी कृष्णा मुंडा की रास्ते में हुए रेल हादसे में मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा रविवार को उनके पैतृक गांव बेसराडीह पहुंचे और शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया।





परिजनों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कृष्णा मुंडा का पार्थिव शरीर पिछले तीन दिनों से वापस गांव नहीं लाया जा सका है। परिवार के लोगों ने इस संबंध में अर्जुन मुंडा को जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द पैतृक गांव लाने के लिए अधिकारियों से बातचीत की।
अर्जुन मुंडा ने राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार और रांची के उपायुक्त से फोन पर बात कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि कृष्णा मुंडा का पार्थिव शरीर सम्मानपूर्वक जल्द से जल्द उनके गांव पहुंचाया जाए और परिजनों को किसी तरह की परेशानी न हो।
माइग्रेंट सेल की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
अर्जुन मुंडा ने झारखंड के माइग्रेंट सेल की कार्यप्रणाली पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रोजगार के लिए राज्य से बाहर जाने वाले कई लोगों की मौत के बाद उनके पार्थिव शरीर को वापस लाने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास करने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में माइग्रेंट सेल को और अधिक सक्रिय और संवेदनशील बनाने की जरूरत है। सरकार को दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए जाने वाले झारखंड के श्रमिकों का अद्यतन डेटा रखना चाहिए, ताकि किसी संकट की स्थिति में उन्हें और उनके परिवारों को तत्काल मदद मिल सके।
सरकार को बनाना चाहिए प्रभावी सहायता तंत्र
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने नागरिकों की जानकारी रखना और विपत्ति के समय उनके परिवारों तक मदद पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है। किसी परिवार को अपने परिजन का पार्थिव शरीर वापस लाने के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़े, ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए।
अर्जुन मुंडा ने दिवंगत कृष्णा मुंडा के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिवार के प्रति संवेदना जताई और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को इस कठिन समय में शक्ति देने की प्रार्थना की।
