

रांची : एंकिलाइजिंग स्पोंडिलाइटिस विषय पर एक राष्ट्रीय चिकित्सा सम्मेलन का आयोजन दिल्ली में किया गया। इस सम्मेलन में झारखंड के प्रतिष्ठित गठिया रोग विशेषज्ञ डॉ देवनीस खेस्स ने कहा कि एंकिलाइजिंग स्पोंडिलाइटिस को सामन्य पीठ दर्द समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। उन्होने कहा कि यदि एंकिलॉज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस का समय पर सही इलाज न कराया जाए, तो यह मरीज को जीवनभर के लिए विकलांग बना सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत किसी योग्य गठिया और वात रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें और इलाज का सबसे बेहतर मानक अपनाएं। सम्मेलन में डॉ देवनीस को शिक्षकों के शिक्षक कहे जानेवाले डॉ आनंद मालवीय ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ वेद चतुर्वेदी ने की।





क्या हैं बीमारी के लक्षण
एंकिलाइजिंग स्पोंडिलाइटिस बीमारी के कई लक्षण हैं। उनमें लगातार 3 महीने से अधिक समय तक पीठ या कमर के निचले हिस्से में दर्द और सूजन। रात के दूसरे पहर (सुबह होने से पहले) दर्द के कारण नींद का बार-बार टूटना। कूल्हों में बारी-बारी से तेज दर्द होना।
जांच: शुरुआती दौर में HLA B 27 टेस्ट पॉजिटिव आना, शरीर में CRP का स्तर बढ़ना और सैक्रोइलियाक जॉइंट (Sacroiliac Joint) के MRI में सूजन के लक्षण दिखना। बाद के चरणों में यह बीमारी एक्स-रे में भी साफ नजर आने लगती है।
