

नयी दिल्ली: चिपकाने वाले पदार्थ और निर्माण रसायन बनाने वाली कंपनी पिडिलाइट इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक सुधांशु वत्स ने कहा है कि कंपनी को महंगाई के दबाव के बावजूद उपभोक्ता मांग मजबूत बने रहने की उम्मीद है और चालू तिमाही में उसे उत्पादों की कीमतों में तत्काल और बढ़ोतरी की जरूरत नहीं दिख रही है।





कंपनी ने पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में हुई तेज वृद्धि की भरपाई के लिए जून तिमाही में अलग-अलग चरणों में उत्पादों की कीमतों में 12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की थी। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव कम होने के बीच पिडिलाइट को चालू तिमाही में और कीमतें बढ़ाने की जरूरत नहीं लग रही है। हालांकि, कंपनी कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बनाए हुए है।
वत्स ने पीटीआई-भाषा से कहा कि जुलाई और अगस्त में मांग का रुझान जून तिमाही के करीब रहा है और भारत में कुल मिलाकर उपभोक्ता धारणा काफी मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर पहली तिमाही की मांग को देखें, तो दूसरी तिमाही में भी मांग मोटे तौर पर कायम है। बाजार को देखने और यात्रा के दौरान जो अनुभव हो रहा है, उससे भी यही पता चलता है।’’
उन्होंने कहा कि महंगाई के दबाव के बावजूद उपभोक्ता धारणा में मजबूती देखकर वह खुद भी आश्चर्यचकित हैं।
फेविकोल, फेविक्विक और डॉ. फिक्सिट जैसे ब्रांड के स्वामित्व वाली पिडिलाइट को वित्त वर्ष 2026-27 में दोहरे अंक में वास्तविक मात्रा वृद्धि दर्ज करने का भरोसा है। कंपनी का कहना है कि शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में मांग मजबूत है और कीमतों को लेकर संतुलित रणनीति से लाभप्रदता भी कायम रखने में मदद मिलेगी।
वत्स ने कहा, ‘‘इस समय हमें कीमतों में और बढ़ोतरी करने की जरूरत नहीं लगती। लेकिन हम स्थिति पर नजर रखेंगे।’’
उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में अब भी उतार-चढ़ाव है और इसमें आगे वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमतें संकट से पहले के करीब 60 डॉलर प्रति बैरल के मुकाबले लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर होती हैं, तो इसका असर आमतौर पर करीब छह महीने में सामने आता है। ऐसे में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये में गिरावट से पैदा हुई कुछ अंतर्निहित महंगाई का बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर डालना पड़ेगा।
वत्स ने बताया कि जिन चुनिंदा ब्रांड के लिए लागत कम हुई है, उन पर पिडिलाइट ने छूट देना भी शुरू कर दिया है।
