


रांची: रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में आउटसोर्स एजेंसी सन फैसिलिटी के तहत कार्यरत करीब 400 कर्मचारियों के सामने एक बार फिर वेतन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। शासी परिषद की 62वीं बैठक में 3.76 करोड़ रुपये से अधिक के बकाए भुगतान को स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक पेंच और एजेंसी को राशि का भुगतान न होने के कारण कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। इस स्थिति से आक्रोशित कर्मचारियों के बीच अनिश्चितता का माहौल है, क्योंकि लगातार लिखित आश्वासन और शासी परिषद के निर्णयों के बाद भी उनके बकाए का स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।





मामले की पृष्ठभूमि में देखा जाए तो एजेंसी ने रिम्स प्रबंधन से कुल 9.26 करोड़ रुपये के बकाए का दावा किया था, जिसके जवाब में रिम्स ने श्रम नियोजन विभाग की दरों और संशोधित संशोधनों के आधार पर गणना कर 3 करोड़ 76 लाख रुपये का संशोधित प्रस्ताव तैयार किया था। इस प्रस्ताव को चार किस्तों में देने की योजना बनी थी, जिसके तहत पहली किस्त के रूप में 94.12 लाख रुपये की राशि तय की गई थी। हालांकि, जब तक रिम्स प्रशासन की ओर से इस राशि का भुगतान एजेंसी को नहीं कर दिया जाता, तब तक आउटसोर्स कर्मचारियों को उनका वेतन मिलना संभव नहीं दिख रहा है।
भुगतान में हो रही देरी का सीधा असर मैनपावर की उपलब्धता और व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। एजेंसी का कहना है कि वे अपने स्तर से कर्मचारियों के वेतन भुगतान का लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन रिम्स से समय पर धन न मिलने के कारण वित्तीय दबाव काफी बढ़ गया है। वहीं दूसरी ओर, दैनिक खर्चों और परिवार के पालन-पोषण के लिए रिम्स में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी पूरी तरह से अपने मासिक वेतन पर निर्भर हैं, जिससे उनके बीच असंतोष गहराता जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर फाइलों के अटकने और स्पष्ट निर्णय के अभाव में यह संकट लगातार बना हुआ है।
