मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाओं पर बजट खर्च करना नहीं, बल्कि ऐसी परियोजनाओं को धरातल पर उतारना है, जिनका किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक लाभ मिल सके। इसी क्रम में हर विधानसभा क्षेत्र में प्रस्तावित कोल्ड स्टोरेज-कम-मार्केटिंग सेंटर की डीपीआर को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने का निर्देश दिया गया।
उन्होंने देश की प्रमुख लॉजिस्टिक और कोल्ड-चेन कंपनियों से तकनीकी सुझाव लेने पर भी जोर दिया। राज्य के करीब 20 जिलों में 5,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज स्थापित किए गए हैं। हालांकि, कई केंद्रों में तकनीकी खामियों के कारण एफपीओ, सहकारी समितियों और थर्ड पार्टी ऑपरेटरों को संचालन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बैठक में सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन के तहत रागी के आटे की आपूर्ति के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इसके लिए रांची, खूंटी और सरायकेला-खरसावां में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना है। मंत्री ने कहा कि इस पहल से स्थानीय किसानों को बाजार मिलेगा और स्कूली बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा सकेगा।
इसके अलावा ‘लाह पोषक समृद्धि योजना’ की भी समीक्षा की गई। योजना के तहत लाह उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सीमियालता, कुसुम, बेर और कैलियेंड्रा जैसे उपयोगी पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। करीब 20 डिसमिल भूमि पर एकीकृत खेती को बढ़ावा देकर किसानों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करने की योजना है।
मंत्री ने अधिकारियों को सभी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने, तकनीकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने और किसानों तक योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।

