रांची : बिहार के जमुई में कोचिंग से लौट रहे नाबालिग छात्र-छात्रा को रास्ते में रोककर उनके साथ मारपीट और छात्रा के साथ कथित बदसलूकी की घटना ने पूरे देश को शर्मसार किया है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि बिहार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में है। जिस राज्य में एक बेटी को सड़क पर रोककर उसके साथ सरेआम बदसलूकी करने का दुस्साहस किया जाए, वहां सरकार की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को अब सिर्फ बयान देने के बजाय जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक तरफ भाजपा ‘बेटी बचाओ’ और ‘नारी शक्ति’ के बड़े-बड़े नारे लगाती है, दूसरी तरफ बेटियों की सुरक्षा की जमीनी तस्वीर बेहद चिंताजनक घटनाओं से सामने आ रही है। क्या ‘बेटी बचाओ’ सिर्फ पोस्टर और भाषणों तक सीमित रह गया है? क्या सत्ता के लिए नारी सम्मान सिर्फ एक राजनीतिक नारा है? राकेश सिन्हा ने कहा कि बिहार की घटना अकेली घटना नहीं है। दिल्ली में भी एक नाबालिग लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस ने चार लोगों को पकड़ा है और जांच जारी है। देश की बेटियां सवाल पूछ रही हैं—सुरक्षा के दावे आखिर जमीन पर कहां हैं?
उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा पर भाषण देने से पहले सरकारों को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी। अपराधी किसी भी दल, जाति या समुदाय से जुड़ा हो, उसके खिलाफ कानून का कठोर और निष्पक्ष इस्तेमाल होना चाहिए। पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए और जांच में किसी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। मीडिया प्रभारी ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री के लिए अब नैतिक जिम्मेदारी से बचने की कोई गुंजाइश नहीं बची है। अगर सरकार अपने राज्य में बेटियों को सुरक्षित माहौल देने में विफल है तो मुख्यमंत्री को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। सत्ता पद और कुर्सी के लिए नहीं, जनता की सुरक्षा और सम्मान के लिए होती है।
उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा, “बेटी बचाओ का नारा बहुत हो चुका, अब बेटियों को बचाने का हिसाब दीजिए। मंचों पर नारी शक्ति का गुणगान और सड़कों पर बेटियों का अपमान—यह दोहरा चरित्र देश की जनता के सामने ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकता।” राकेश सिन्हा ने मांग की कि जमुई मामले की जांच समयबद्ध तरीके से पूरी कर सभी दोषियों को कानून के अनुसार कठोर सजा दिलाई जाए तथा बिहार सरकार महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा के लिए अपनी जवाबदेही सार्वजनिक रूप से तय करे।


