रांची: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत पुराने और वर्तमान रिकॉर्ड्स में गड़बड़ी व विसंगतियां मिलने के बाद रांची में बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस मिलने के बाद अपनी स्थिति स्पष्ट करने और दस्तावेजों का सत्यापन कराने के लिए बीएलओ (BLO) व निर्वाचकों के कार्यालयों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। विशेष रूप से मतदाताओं की उम्र, नाम, उपनाम (सरनेम) और माता-पिता के नाम की स्पेलिंग में अंतर मिलने के कारण रिकॉर्ड्स का मिलान नहीं हो पा रहा है। कई मामलों में हिंदी और अंग्रेजी में दर्ज नामों की वर्तनी में भिन्नता है, तो कहीं सरनेम छूट जाने या शादी के बाद महिलाओं के नाम व उपनाम में बदलाव के कारण पुरानी फाइलों से डेटा मैच नहीं कर रहा है। मतदाताओं का कहना है कि वर्षों से चली आ रही ये गलतियां अब एसआईआर प्रक्रिया के दौरान उजागर हुई हैं।

नोटिस का मतलब नाम कटना नहीं: निर्वाचन अधिकारी
मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए निर्वाचन अधिकारियों ने कहा है कि नोटिस भेजने का उद्देश्य मतदाता का नाम सीधे सूची से हटाना नहीं है, बल्कि रिकॉर्ड में दर्ज विसंगतियों का सत्यापन करना है। पात्र मतदाता संबंधित दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रख सकते हैं तथा नए पंजीकरण या सुधार के लिए निर्धारित फॉर्म भर सकते हैं।
इन कारणों से भेजे जा रहे हैं नोटिस
भाई-बहनों की जन्म तिथि में नौ महीने से कम का अंतर होना।
माता-पिता और बच्चों की उम्र में 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक का अंतर होना।
दादा-दादी और पोते-पोतियों की उम्र में 40 वर्ष से कम का अंतर मिलना।
मौजूदा रोल और पिछले पुनरीक्षण के दौरान अलग-अलग पैरेंट नेम होना।
माता-पिता के अलग-अलग रिश्ते (जैसे पिता एक रोल में और मां दूसरे रोल में)।
शादीशुदा महिलाओं का वर्तमान में पति से जुड़ा होना, जबकि पिछले रिकॉर्ड में पिता के नाम से दर्ज होना।
नाम या स्पेलिंग में अंतर, एक ही माता-पिता के 6 से अधिक बच्चे होना या रिवीजन के बाद अविश्वसनीय बदलाव दिखना।


