रांची: झारखंड सरकार के दिवंगत मंत्री और पूर्व विधायक सुदिव्य कुमार सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा को डुमरी उपचुनाव से पहले ही मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए या चुनाव जीतने के बाद, इसे लेकर राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ही लेना है। इस निर्णय को राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

डुमरी के पूर्व विधायक सुदिव्य कुमार के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर श्वेता शर्मा को प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और गठबंधन की ओर से अभी इसकी औपचारिक घोषणा की जानी बाकी है। लेकिन बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि श्वेता शर्मा को पहले ही मंत्रिमंडल में स्थान दिया जाए या फिर पहले वे उपचुनाव जीतकर आएं, जिसके बाद उन्हें मंत्री बनाया जाए।
कोल्हान का समीकरण भी अहम
मंत्रिमंडल विस्तार और उपचुनाव के इस फैसले के साथ-साथ कोल्हान क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों को साधना भी सरकार और झामुमो के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। सुदिव्य कुमार के निधन के बाद कोल्हान के स्थानीय नेतृत्व को साधे रखना पार्टी के लिए एक चुनौती है। कोल्हान में कुड़मी और आदिवासी मतदाताओं का बड़ा प्रभाव है, जिसे ध्यान में रखते हुए सरकार ऐसा कोई भी कदम उठाना चाहेगी जिससे पार्टी के इस मजबूत गढ़ में संतुलन बना रहे।
जोबा मांझी के सांसद बनने के बाद उपजी स्थितियां
हालिया लोकसभा चुनाव में जोबा मांझी के सांसद चुने जाने के बाद राज्य मंत्रिमंडल में एक सीट और खाली हुई है। ऐसे में कोल्हान और संथाल क्षेत्र के क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट फिर से शुरू हो गई है। पार्टी के भीतर इस बात पर भी विचार चल रहा है कि क्या श्वेता शर्मा को तत्काल प्रभाव से मंत्री बनाकर चुनाव में उतरा जाए या पहले उन्हें डुमरी से चुनावी मैदान में उतारा जाए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जल्द ही अपने सहयोगियों से विचार-विमर्श कर इस पर अंतिम निर्णय ले सकते हैं।


