झारखंड में पांच वर्षों में चार गुना से अधिक बढ़े स्नेक बाईट के मामले, जानें कितने मरीज आए सामने

झारखंड में स्नेक बाईट के मामले तेजी से बढ़े हैं। अगस्त 2026 तक 4,623 मामले और 12 मौतें दर्ज हुईं, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने एएसवी उपलब्धता बढ़ाने के निर्देश दिए।

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रांची: झारखंड में स्नेक बाईट (सांप काटने) के मामलों में पिछले पांच वर्षों के दौरान अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस वर्ष अगस्त 2026 तक राज्य में सांप काटने के कुल 4,623 मामले और 12 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। यह आंकड़ा वर्ष 2025 के कुल 4,078 मामलों को भी पार कर गया है। मानसून के मौसम में ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इंसानों और सांपों के आमने-सामने आने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जो राज्य में एक गंभीर चुनौती का रूप ले रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में वर्ष 2022 में स्नेक बाईट के 1,095 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2023 में बढ़कर 1,647 और 2024 में 2,760 हो गए। वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या 4,078 तक पहुंच गई, जबकि इस वर्ष 2026 के शुरुआती आठ महीनों में ही यह आंकड़ा 4,623 पर पहुंच चुका है। जिलों की बात करें तो गढ़वा में सबसे अधिक 547 मामले और 3 मौतें दर्ज की गईं, जबकि लातेहार में 483 मामले और 6 मौतें दर्ज हुई हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी स्वास्थ्य केंद्रों को एंटी-स्नेक वेनम (ASV) के स्टॉक की निगरानी करने और कमी होने पर नजदीकी अस्पतालों से आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। वर्तमान में रांची जिले के पास 6,214 वायल ASV स्टॉक में उपलब्ध हैं। जिला महामारी विशेषज्ञ डॉ. राजीव भूषण ने बताया कि सर्पदंश के पीड़ित को बिना किसी देरी के नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना बेहद महत्वपूर्ण है। सांप काटने के बाद हर मिनट कीमती होता है। मरीज को शांत रखें, उसकी अनावश्यक हलचल को रोकें और जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाएं। वहीं सदर के उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश सिंह ने कहा कि सर्पदंश को एक मेडिकल इमरजेंसी की तरह देखा जाना चाहिए, सही समय पर मिले इलाज से गंभीर जटिलताओं और मौतों को रोका जा सकता है।

इन बातों का रखें ध्यान

पीड़ित को शांत रखें और हिम्मत बंधाएं।
सूजन आने से पहले प्रभावित अंग से अंगूठी, चूड़ी, घड़ी या तंग कपड़े तुरंत हटा दें।
मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। केवल प्रशिक्षित डॉक्टरों की देखरेख में ही एंटी-स्नेक वेनम लगवाएं।
मरीज को ले जाने के लिए एम्बुलेंस या आपातकालीन वाहन का उपयोग करें।
सांप के काटने वाले स्थान पर कोई कट न लगाएं और न ही चीरा मारें।
मुंह से जहर चूसने या उसे खुद से निकालने की कोशिश न करें।
घाव पर बर्फ, रसायन, जड़ी-बूटी, मिर्च, मिट्टी का तेल या कोई अन्य घरेलू चीज न लगाएं।
प्रभावित अंग पर कसकर पट्टी या टूर्निकेट न बांधें, इससे रक्त संचार रुक सकता है और अंग खराब हो सकता है।
पीड़ित को पैदल न चलाएं और न ही दौड़ाएं।
मरीज को शराब या कोई भी झाड़-फूंक वाला/अप्रमाणित घरेलू नुस्खा न दें।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।