रांची : रिम्स के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की ओर से बुधवार को कैंसर के आधुनिक उपचार और प्रबंधन पर आधारित सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) एवं कीमो पोर्ट पर हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक व व्यावहारिक सत्र का मुख्य उद्देश्य चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को कैंसर के निदान व इलाज की नवीनतम तकनीकों से अवगत कराने के साथ-साथ उनके व्यावहारिक कौशल को और मजबूत बनाना था।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने कैंसर के बदलते स्वरूप, आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और मरीजों के बहु-विषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि कैंसर रोगियों को बेहतर इलाज देने के लिए विभिन्न विभागों का आपसी समन्वय और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों को अपनाना बेहद जरूरी है। सत्र का मुख्य आकर्षण कीमो पोर्ट पर आयोजित व्यावहारिक प्रशिक्षण रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि कीमोथेरेपी लेने वाले मरीजों के लिए लंबे समय तक सुरक्षित और आसान शिरापरक पहुंच (वेनस एक्सेस) सुनिश्चित करने में कीमो पोर्ट बेहद कारगर है। प्रशिक्षण में हिस्सा ले रहे प्रतिभागियों को कीमो पोर्ट लगाने की सही तकनीक, इसमें बरती जाने वाली सावधानियों और संभावित जटिलताओं के प्रबंधन की बारीकियों से व्यावहारिक रूप से रूबरू कराया गया।
यह पूरा आयोजन सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ. अजीत कुमार कुशवाहा और डॉ. रोहित कुमार झा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रिम्स के निदेशक प्रो. डॉ. डी.के. सिन्हा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कौशल-आधारित अकादमिक आयोजन चिकित्सकों की कार्यकुशलता बढ़ाने में बेहद मददगार साबित होते हैं। इस आयोजन में रिम्स के विभिन्न विभागों के डॉक्टरों, रेजिडेंट्स और स्वास्थ्यकर्मियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।


