रांची: झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा अपनाए गए नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने बीआईटी मेसरा को ‘विशेषज्ञों की कमेटी’ गठित कर नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया की तकनीकी जांच करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने बीआईटी मेसरा से रिपोर्ट के माध्यम से स्पष्ट करने को कहा है कि परीक्षा में अपनाया गया नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला उचित है या नहीं और क्या परीक्षा परिणाम तैयार करने में इस फॉर्मूले का सही तरीके से इस्तेमाल किया गया है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 29 नवंबर को तय की गई है। अदालत इस मामले में लगभग 100 अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही है। उल्लेखनीय है कि राज्य में 26,001 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी, लेकिन महज 11 हजार पदों पर ही नियुक्ति हो सकी थी।

क्या होता है नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला?
जब प्रतियोगी परीक्षाएं कई पालियों में आयोजित की जाती हैं, तो उनके प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर में अंतर हो सकता है। किसी पाली में प्रश्न अपेक्षाकृत कठिन तो किसी में आसान हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में विभिन्न पालियों के अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को तुलनीय बनाने और उनके अंकों का समानीकरण करने के लिए नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
जेपीएससी-सीजीएल परीक्षा की सीबीआई जांच पर 5 अक्टूबर को सुनवाई
इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट में जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा तथा जेएसएससी की सीजीएल परीक्षा में कथित गड़बड़ी की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जायमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने मामले को दूसरी बेंच में भेजने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।


