रांची: 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) में सफलता दिलाने के नाम पर हुए कथित सौदेबाजी का सबसे अहम सुराग 15.90 लाख रुपये के मनी ट्रेल से मिला है। सीआईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि अभ्यर्थी सुमन राज उर्फ सौरव सुमन के पिता अभय कुमार और परिवार से जुड़े लोगों से कथित बिचौलिए पवन कुमार सिंह के खाते में यूपीआई और आरटीजीएस के जरिए कुल करीब 15.90 लाख रुपये भेजे गए थे। जांच में सामने आया कि सुमन ने अभय कुमार सिंह से 14वीं जेपीएससी परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए संपर्क किया था। इसके लिए कथित तौर पर 80 लाख रुपये की मांग की गई थी और करीब 16 लाख रुपये का भुगतान होने की बात जांच में सामने आई है। इस वित्तीय लेन-देन के बाद सुमन की परीक्षा को लेकर जनवरी 2026 में बड़ी डील हुई थी। आरोपी ने स्वीकार किया कि परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए उसने 80 लाख रुपये में डील की थी, जिसके तहत अभ्यर्थी से करीब 5 लाख रुपये कमीशन मिलना तय हुआ था।

जांच के दौरान सीआईडी को आरोपी के लैपटॉप से 24 अभ्यर्थियों की एक सूची भी बरामद हुई है, जो इस परीक्षा में शामिल हुए थे। इसके अलावा, ओएमआर शीट और उसके कैंडिडेट/कार्बन कॉपी में भी भारी अंतर सामने आया है। सीआईडी के अनुसार, ओएमआर शीट पर दर्ज उत्तर और कार्बन कॉपी के उत्तरों में बड़ा अंतर पाया गय। मूल ओएमआर शीट में दर्ज कई उत्तर बदले गए थे। जांच में यह भी पाया गया कि अभ्यर्थी द्वारा ओएमआर शीट में जो स्थान खाली छोड़े गए थे, मूल ओएमआर में बाद में अतिरिक्त उत्तर दर्ज किए गए थे।
जांच में परीक्षा की गोपनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सीआईडी के अनुसार, एक एजेंसी के कंप्यूटर में आंसर-की की अनधिकृत फाइल मिलने की बात सामने आई है। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की गोपनीय आंसर-की तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक द्वारा टीडीपीएल के कर्मचारी को व्हाट्सएप के जरिए भेजे जाने का भी उल्लेख केस डायरी में है। आरोपी 29 जुलाई से न्यायिक हिरासत में है।


