रांची: गांधी जयंती पर रांची नगर निगम ने राजधानी को अधिक स्वच्छ, ऊर्जा-दक्ष और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक साथ कई पहल की। निगम कार्यालय परिसर में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान महापौर रोशनी खलखो और उप महापौर नीरज कुमार ने शहर के विकास, स्वच्छता व्यवस्था में सुधार तथा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाली तीन बड़ी परियोजनाओं का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर नगर आयुक्त सुशांत गौरव, अपर नगर आयुक्त संजय कुमार, उप नगर आयुक्त रविंद्र कुमार सहित निगम के कई वरीय अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।


पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रांची नगर निगम कार्यालय में जरेडा के माध्यम से 50 KVA क्षमता का सोलर पैनल सिस्टम (बैटरी बैकअप के साथ) स्थापित किया गया है। महापौर द्वारा इस प्रणाली का शुभारंभ किए जाने के बाद अब निगम कार्यालय के बेसमेंट, ग्राउंड, फर्स्ट और सेकंड फ्लोर सहित अन्य मंजिलों में आवश्यकतानुसार सौर ऊर्जा का वितरण किया जाएगा। इस पहल से पारंपरिक विद्युत पर निगम की निर्भरता कम होगी, जिससे भारी मात्रा में बिजली व्यय में बचत होने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन को घटाने में भी मदद मिलेगी। हर महीने लगभग डेढ़ लाख रुपए की बचत होगी। महापौर ने इस अवसर पर कहा कि ऊर्जा संरक्षण वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता है और निगम का निरंतर प्रयास रहेगा कि अपनी कार्यप्रणाली में ज्यादा से ज्यादा ग्रीन और सस्टेनेबल अभ्यासों को शामिल किया जाए।
दूसरी ओर शहर की स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए यूनियन बैंक द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी मद से 10 नए ट्रैक्टर-सह-ट्रॉली उपलब्ध कराए गए। इन सभी वाहनों को महापौर और उप महापौर ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। आगामी त्योहारों को देखते हुए इन नए ट्रॉलियों से शहर के विभिन्न वार्डों में कचरा उठाव और परिवहन का काम बेहद सुलभ और त्वरित हो जाएगा। ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान को मजबूती प्रदान करने वाले इस सहयोग के लिए नगर निगम ने यूनियन बैंक के प्रति आभार प्रकट किया और नागरिकों से भी शहर को सुंदर बनाए रखने में भागीदारी की अपील की।

इसी क्रम में प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग्स के प्रयोग को रोकने और महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से नागा बाबा सब्जी बाजार में राज्य की पहली ‘बायोडिग्रेडेबल पॉलीबैग निर्माण इकाई’ की स्थापना की गई है। इस इकाई का संचालन एरिया लेवल फेडरेशन से जुड़ी महिला सदस्यों द्वारा किया जाएगा। PVAT और फिलर के 7:3 अनुपात से बनने वाले इन इको-फ्रेंडली बैग्स की उत्पादन क्षमता 40 किलोग्राम प्रति घंटा रखी गई है। लगभग 140 रुपये प्रति किलो की लागत से तैयार होने वाले इन बैगों का संभावित बिक्री मूल्य 160 रुपये तय किया गया है, जिससे महिलाओं को प्रति किलो 20 रुपये का सीधा अधिशेष प्राप्त होगा। झारखंड में किसी भी नगर निकाय द्वारा की गई यह अपने आप में पहली और अनोखी पहल है, जो प्लास्टिक प्रदूषण पर अंकुश लगाने के साथ-साथ स्थानीय महिलाओं के लिए स्वरोजगार, प्रबंधन और विपणन कौशल विकसित करने का सशक्त माध्यम बनेगी।


