मुंबई : मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार दोपहर मुंबई के शिवाजी पार्क में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) की अगुवाई वाले प्रदर्शन में हजारों लोग जुटे। पुलिस द्वारा प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद नारे लिखी तख्तियां और तिरंगा लिए बड़ी संख्या में युवा राजनीतिक रैलियों के लिए प्रसिद्ध इस मैदान में पहुंचे। अभिनेता नसीरुद्दीन शाह भी प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे।

इलाके में पुलिस और सुरक्षाबलों की भी बड़ी संख्या में तैनाती की गई है। शिवसेना (उबाठा) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने कॉजपा के आंदोलन को समर्थन दिया है। कॉजपा के विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर शुक्रवार को शिवाजी पार्क के आसपास बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया। पुलिस और रेलवे अधिकारियों ने शाम चार बजे प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मध्य मुंबई में दादर स्टेशन और शिवाजी पार्क मैदान के आसपास सुरक्षा कड़ी की। एक अधिकारी ने बताया कि किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस और अन्य एजेंसियों के सुरक्षा कर्मियों को रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया है।
उन्होंने कहा कि शिवाजी पार्क की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर व्यापक स्तर पर बैरिकेड भी लगाए गए हैं। इस बीच, इलाके के निवासियों ने अपने पड़ोस में प्रदर्शन आयोजित किए जाने का कड़ा विरोध किया है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, ‘‘प्रस्तावित प्रदर्शन हमारे इलाके की शांति और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है। वे इसे जबरन आयोजित करने की कोशिश कर रहे हैं। आवासीय क्षेत्र में इस तरह के प्रदर्शनों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।’’ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नजदीकी दादर इलाके में यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है।
इससे पहले दिन में, कॉजपा के संयोजक अभिजीत दीपके ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर दक्षिण मुंबई में उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। कॉजपा सीईसी की नियुक्ति में पारदर्शिता की मांग करने के साथ ही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर रहा है । कॉजपा ने यह मांग तब की जब कुछ दिनों पहले ही अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने देशभर में मतदाता सूची के ‘एसआईआर’ के दौरान नाम जोड़े और हटाए जाने समेत कई मुद्दों पर आपत्तियां जताई थीं।
निर्वाचन आयोग ने हालांकि एक बयान में स्पष्ट किया था कि तीन सदस्यीय आयोग ने एसआईआर समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए हैं।


