रांची: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में 734 करोड़ रुपये के जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले में कई बड़े खुलासे हुए हैं। ईडी के अनुसार, इस घोटाले को अंजाम देने के लिए मुख्य आरोपी जायसवाल बंधुओं (ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू और राज जायसवाल) ने अपने रिश्तेदारों, परिजनों और कर्मचारियों के नाम पर फर्जी कंपनियां बनाकर करीब 54.33 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है। ईडी ने 30 सितंबर 2026 को जमशेदपुर और कोलकाता में स्थित चार ठिकानों पर छापेमारी कर दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जीवाड़े के लिए 135 शैल (कागजी) कंपनियों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया था, जो केवल कागजों पर मौजूद थीं। इन फर्जी कंपनियों के जरिए बिना किसी माल या सेवा की वास्तविक आपूर्ति के 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी इनवॉइस जारी किए गए थे। मुख्य आरोपी ज्ञानचंद और राज जायसवाल इस पूरे घोटाले के मुख्य लाभार्थी थे। इन्होंने मेसर्स मां शारदा एंडेवर्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स मेकर्स कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स केदारनाथ ट्रैक्सिम प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स जय भोले एंटरप्राइजेज जैसी संस्थाओं के माध्यम से 54.33 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी रूट किया।
अवैध कमाई का संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल
आरोपियों ने फर्जीवाड़े से मिली अवैध कमाई का इस्तेमाल अपनी व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ाने और चल-अचल संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में किया। ईडी अब तक इस मामले में 20 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति ( PAO ) कुर्क कर चुकी है। इससे पहले मई और अगस्त 2025 में कोलकाता, जमशेदपुर और रांची में की गई छापेमारी के दौरान लगभग 70 लाख रुपये नकद व बैंक बैलेंस जब्त और फ्रीज किए गए थे। मामले में 8 मई 2025 को गिरफ्तार किए गए चार अन्य आरोपियों में से तीन फिलहाल जेल में हैं। हाल ही में सीए संजय पारेख और जायसवाल के आवासीय व कार्यालय परिसरों से भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं।


