रांची: झारखंड में लोगों के स्वास्थ्य और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। अब राज्य में सड़क किनारे ठेले-खोमचे पर बिकने वाले गोलगप्पे और समोसे से लेकर चार सितारा होटलों में परोसे जाने वाले खाद्य उत्पादों तक की सघन जांच की जाएगी। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलों के अभिहित पदाधिकारियों और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर बुधवार से पूरे राज्य में विशेष जांच अभियान चलाने के कड़े निर्देश दिए हैं। आगामी त्योहारों, विशेषकर दुर्गा पूजा को देखते हुए बाजार में मिलावटी या दूषित खाद्य सामग्री की बिक्री रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

अपर मुख्य सचिव ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि जांच केवल मिठाई या पनीर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सभी प्रकार के खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए जाएंगे। यदि जांच में मिलावट या गुणवत्ता में कोई कमी पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए संयुक्त खाद्य सुरक्षा आयुक्त को स्वयं फील्ड में उतरकर सैंपलिंग और जांच प्रक्रिया का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा त्वरित जांच के लिए तीन चलंत जांच वाहन लगाए जा रहे हैं, जिनमें से दो रांची और एक धनबाद में तैनात रहेगा, ताकि मौके पर ही प्राथमिक जांच की जा सके।
त्योहारों से पहले जांच प्रक्रिया में कोई बाधा न आए, इसके लिए रांची स्थित फूड सेफ्टी लैब में सभी सुविधाएं दुरुस्त करने और आवश्यक रसायनों की अग्रिम खरीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया है। विभाग ने अधिकारियों को एफएसएसएआई के नियमों का कड़ाई से अनुपालन कराने के निर्देश दिए हैं। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि आम जनता की सेहत से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और दुर्गा पूजा से पहले एक बार फिर बैठक कर अभियान की समीक्षा की जाएगी। इस बैठक में विभाग की विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, अपर सचिव संदीप कुमार दोराईबुरू और संयुक्त सचिव अनुज कुमार प्रसाद सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।


