नयी दिल्ली: जीएसटी परिषद कर दरों में बदलाव के किसी भी प्रस्ताव पर साल में केवल एक बार विचार करेगी और आगे से जीएसटी दरों में सभी बदलाव एक अप्रैल यानी वित्त वर्ष की शुरुआत से लागू किए जाएंगे। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता और राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी परिषद ने पिछले साल सितंबर में कर दरों और स्लैब को तर्कसंगत बनाने का निर्णय किया था। चार स्लैब वाले जीएसटी (पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत) को बदलकर पांच और 18 प्रतिशत की दो-दर वाली व्यवस्था लागू की गई थी।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि आठ अक्टूबर को होने वाली 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक के एजेंडा में कर दरों में बदलाव शामिल नहीं है।
सूत्रों ने कहा कि भविष्य में दरों में बदलाव के प्रस्ताव साल में एक बार ही लाए जाएंगे और उन्हें एक अप्रैल यानी नये वित्त वर्ष से लागू किया जाएगा। आगामी बैठक में दरों को तर्कसंगत बनाने और अस्पष्टता दूर करने से जुड़े सीमित मुद्दों पर विचार किया जाएगा।
अन्य प्रस्तावों के तहत परिषद यह मंजूर कर सकती है कि ई-कॉमर्स मंच के जरिये की जाने वाली आपूर्ति पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के बिना पांच प्रतिशत की एकल जीएसटी दर लागू होगी।
एक सूत्र ने कहा, “ज्यादातर कारोबारियों के लिए किसी एक रियायत से अधिक महत्वपूर्ण निश्चिततता है।” उन्होंने कहा कि स्थिर कर दर व्यवस्था से अनुबंधों की पूरी अवधि के लिए कीमत तय करने और पूंजीगत व्यय की योजना बनाने में मदद मिलती है।’’
सूत्रों ने कहा कि पिछले साल पुनर्गठित जीएसटी करीब एक साल से लागू है और इससे उपभोक्ताओं, उद्योग, कर राजस्व तथा अर्थव्यवस्था को लाभ हुआ है।
पिछले साल जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाए जाने से खपत को बढ़ावा मिला है और जीएसटी राजस्व में भी वृद्धि हुई है। इस साल जून से मासिक जीएसटी राजस्व में दहाई अंक में वृद्धि हुई है।


