भ्रष्टाचार की शिकायतों पर एसीबी की ढिलाई पर हाईकोर्ट सख्त, अब 3 माह में पूरी करनी होगी प्रारंभिक जांच

झारखंड हाईकोर्ट ने एसीबी की प्रारंभिक जांच को लेकर सख्ती दिखाई, तीन महीने में जांच पूरी करने का निर्देश दिया, विशेष परिस्थितियों में ही छह महीने की अनुमति होगी।

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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर प्रारंभिक जांच के नाम पर मामलों को सालों तक लटकाए रखने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि प्रारंभिक जांच को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने निर्देश दिया है कि एसीबी को हर प्रारंभिक जांच तीन महीने के भीतर पूरी करनी होगी। जांच की अवधि को केवल विशेष परिस्थितियों में अधिकतम छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है, जिसके लिए ठोस कारण दर्ज करने होंगे। यदि इसके बाद भी जांच जारी रखनी है, तो एजेंसी को हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी।

कोर्ट ने यह आदेश एक आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान हस्तक्षेप याचिका पर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि एसीबी में कई प्रारंभिक जांच 11 साल से भी अधिक समय से लंबित हैं। जांच पूरी न होने के कारण संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को वर्षों तक अनिश्चितता में रहना पड़ रहा है और कई लोग सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। कोर्ट ने कहा कि जांच में अकारण देरी से संबंधित पक्षों को विभिन्न प्रशासनिक व अन्य कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।