रांची: गर्भवती और धात्री महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के लिए सिर्फ सरकारी योजनाओं और आर्थिक सहायता तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। परिवार और समाज का सहयोग और स्वस्थ व्यवहारों को अपनाना भी उतना ही जरूरी है। यह बात समाज कल्याण निदेशक किरण पासी ने मातृ पोषण से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान कही। समाज कल्याण निदेशालय और आईपीई ग्लोबल के संयुक्त तत्वावधान में मातृ पोषण से संबंधित प्रारूपिक अध्ययन के निष्कर्षों को साझा करने और सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन संचार (एसबीसीसी) रणनीति के अनावरण के लिए एक कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें मातृ पोषण की स्थिति और उसे बेहतर बनाने के लिए जरूरी कदमों पर चर्चा हुई।

किरण पासी ने कहा कि झारखंड ने हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना समेत कई सेवाओं और योजनाओं का लाभ गर्भवती और धात्री महिलाओं तक पहुंचाने में उल्लेखनीय प्रगति की है। हालांकि, सेवाओं की पहुंच बढ़ने के बावजूद मातृ पोषण से जुड़े कई जरूरी व्यवहारों और परिवार के स्तर पर की जाने वाली आवश्यक कार्रवाइयों में अपेक्षित बदलाव अब भी चुनौती बना हुआ है। निदेशक ने कहा कि केवल सेवाएं और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। स्थायी बदलाव तभी संभव है, जब परिवार और समुदाय स्वस्थ व्यवहारों को अपनाएं और गर्भवती महिलाओं को जरूरी सहयोग दें।
उन्होंने एनएफएचएस-6 और आईपीई ग्लोबल के अध्ययन के निष्कर्षों का भी जिक्र किया। किरण पासी ने कहा कि इन निष्कर्षों से पता चलता है कि गर्भावस्था का समय पर पंजीकरण, नियमित चार प्रसवपूर्व जांच, विविध और पौष्टिक आहार का सेवन, आयरन-फोलिक एसिड की खुराक लेना, गर्भावस्था के दौरान उचित वजन बढ़ना और पर्याप्त आराम जैसे व्यवहारों को और मजबूत करने की जरूरत है। इसके साथ ही परिवार, खासकर पति और सास की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया। गर्भवती महिलाओं को सही पोषण और जरूरी देखभाल के लिए परिवार की ओर से लगातार सहयोग मिलना मातृ स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अहम हो सकता है।


