रांची : झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा की अध्यक्षता में मंगलवार को सदर अस्पतालों की पुनर्संरचना और विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के वित्तीय व्यय की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में मानव संसाधन की उपलब्धता, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के विस्तार तथा ‘मुख्यमंत्री अस्पताल रखरखाव योजना’ जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया गया।

विशेष सचिव ने सख्त रुख अपनाते हुए ‘मुख्यमंत्री अस्पताल रखरखाव योजना’ के तहत आवंटित राशि को एक सप्ताह के भीतर शत-प्रतिशत स्वीकृत करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि मदर टेरेसा एडवास्ड हेल्थ क्लिनिक और आउटसोर्सिंग मद की लंबित प्रक्रियाओं को भी एक सप्ताह में पूरा किया जाए, अन्यथा जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। इसके साथ ही पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी सिविल सर्जनों को डिजिटल हस्ताक्षर तैयार कराने और आउटसोर्स कर्मियों के प्रमाणपत्र एचआरआईएस पोर्टल पर अपलोड करने के आदेश दिए गए। जल्द ही अस्पतालों में कर्मियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली भी लागू की जाएगी, जिसके संचालन के लिए दो चिकित्सकों को नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा।
स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए विशेष सचिव ने राज्यभर के स्वास्थ्य संस्थानों की पुनर्संरचना का खाका तैयार करने को कहा। उन्होंने सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि वे अपने जिलों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, अनुमंडलीय और जिला अस्पतालों में स्वीकृत एवं कार्यरत पदों की समीक्षा करें। यदि कहीं अतिरिक्त कर्मचारियों की आवश्यकता है, तो जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट या आउटसोर्सिंग के माध्यम से बहाली का ठोस प्रस्ताव शुक्रवार तक विभाग को भेजें।
जिले स्तर पर गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया। विशेष सचिव ने निर्देश दिया कि जिला अस्पतालों में कुल बेड क्षमता का 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा आईसीयू (ICU) और सीसीयू (CCU) में बदला जाए। इसके अलावा, नवजात शिशुओं के लिए एसएनसीयू की क्षमता का आकलन करने तथा निर्मित ट्रॉमा सेंटरों को जल्द से जल्द पूरी तरह क्रियाशील बनाने के निर्देश दिए गए।
जिले में ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सदर अस्पतालों में डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (DNB) पाठ्यक्रम शुरू करने की पहल की जा रही है। शुरुआती चरण में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 5 से 6 बड़े अस्पतालों में शुरू किया जाएगा। अस्पतालों का चयन वहां मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑपरेशन थिएटर, लाइब्रेरी और फैकल्टी के आधार पर होगा। इसके लिए राज्य स्तर पर एक संचालन समिति और जिला स्तर पर अलग टीमों का गठन किया जाएगा।
इस बैठक में निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. पी. भट्टाचार्य, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. प्रभात कुमार समेत सभी जिलों के सिविल सर्जन उपस्थित थे। विशेष सचिव ने स्पष्ट किया कि सभी योजनाओं और निर्देशों का पालन तय समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए।


