चाईबासा: कोल्हान विश्वविद्यालय चाईबासा के मनोविज्ञान विभाग में सोमवार को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों और लगभग 100 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, शुरुआती लक्षणों की पहचान करना और समय पर उचित मनोवैज्ञानिक सहायता प्राप्त करने के महत्व को समझाना था।

महत्वपूर्ण है मानसिक स्वास्थ्य
मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल दीप ने वर्तमान जीवनशैली, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सामाजिक दबावों को मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले मुख्य कारण बताए। वहीं, विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. धर्मेंद्र रजक ने कहा कि जिस प्रकार हम शारीरिक स्वास्थ्य के लिए खान-पान और चिकित्सीय देखभाल पर ध्यान देते हैं, वैसे ही मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने अवसाद, चिंता, अत्यधिक तनाव और आत्महत्या की रोकथाम जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
व्यवहार में बदलाव को पहचानें
डॉ. धर्मेंद्र ने विद्यार्थियों को समझाया कि यदि कोई व्यक्ति अचानक अत्यधिक उदास रहने लगे, अकेले में रोए, लोगों से बातचीत कम कर दे, खाने-पीने में रुचि खो दे या छोटी-छोटी बातों पर अत्यधिक गुस्सा और चिड़चिड़ापन दिखाए तो इसे सामान्य स्वभाव मानकर नजरअंदाज न करें। यह तनाव या अवसाद का संकेत हो सकता है। ऐसे समय में व्यक्ति का मजाक उड़ाने के बजाय उससे सहानुभूति से बात करें और जरूरत पड़ने पर किसी विशेषज्ञ या काउंसलर से संपर्क करें।
मानसिक स्वास्थ्य हर दिन का विषय
टाटा कॉलेज से आए डॉ. नित्यानंद साहू ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को वर्ष में केवल एक दिन तक सीमित न रखकर इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने सभी को अपने आस-पास के लोगों की भावनाओं के प्रति संवेदनशील रहने की सलाह दी। समाज से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और समय पर मदद लेकर अनमोल जिंदगी बचाने का संदेश दिया गया। इस दौरान डॉ. जैकी अहमद, डॉ. दुर्गा तमसोई, डॉ. दारा सिंह गुप्ता, डॉ. मीनाक्षी मुंडा, अभिषेक और पंकज सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


