रांची: झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने झारखंड सचिवालय सेवा के अधिकारियों की औपबंधिक (प्रोविशनल) वरीयता सूची जारी कर दी है। यह सूची वरीयता निर्धारण से जुड़े नियमों में संशोधन और झारखंड हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों के आलोक में तैयार कर प्रकाशित की गई है।विभागीय जानकारी के अनुसार, बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत अंतिम संवर्ग विभाजन के बाद झारखंड आए सचिवालय सेवा के पदाधिकारियों की वरीयता पहले तय की गई थी।

इसके बाद एकल व पारस्परिक आधार पर स्थानांतरण के जरिए झारखंड आए कर्मियों की वरीयता निर्धारण के लिए भी प्रावधान बनाए गए थे। हाल ही में हाईकोर्ट में दायर दो मामलों में 1 जुलाई 2026 को पारित न्यायादेशों को ध्यान में रखते हुए वरीयता निर्धारण से संबंधित परिपत्र में आवश्यक संशोधन किया गया है। संशोधित प्रावधान के अनुसार, पारस्परिक स्थानांतरण के मामलों में वरीयता निर्धारण की शर्तें केवल उन्हीं कर्मियों पर लागू होंगी, जिनके स्थानांतरण आदेश में वरीयता का दावा मान्य न होने या संबंधित विभागीय पत्रों के आधार पर वरीयता तय करने का स्पष्ट उल्लेख है।
विभाग ने इस जारी औपबंधिक वरीयता सूची में दर्ज तथ्यों पर दावा या आपत्ति दर्ज कराने के लिए सात दिनों का समय प्रदान किया है। संबंधित पदाधिकारी पूर्ण साक्ष्यों के साथ विभागीय सचिव को संबोधित करते हुए लिखित रूप में अथवा ई-मेल (dopjharkhand@gmail.com) के माध्यम से अपनी आपत्ति भेज सकते हैं। प्राप्त होने वाली सभी आपत्तियों पर विचार-विमर्श करने के उपरांत अंतिम वरीयता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। यह औपबंधिक सूची विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.dop.jharkhand.gov.in के ‘ग्रेडेशन लिस्ट’ फोल्डर में अवलोकन के लिए उपलब्ध है।


