कोलकाता: कोलकाता के चोरबागान इलाके के निवासियों ने दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ के लिए अचानक तेज बारिश, संकरी जगह, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और उसे नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त स्वयंसेवकों एवं पुलिसकर्मियों की कमी को रविवार को जिम्मेदार ठहराया।

चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ की घटना में शनिवार को कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और 25 घायल हो गए हैं।
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि तेज बारिश होने के कारण पंडाल के अंदर मौजूद लोग बारिश रुकने का इंतजार कर रहे थे, जबकि बाहर इंतजार कर रहे लोग बेसब्र होकर पहले से ही खचाखच भरे पंडाल में प्रवेश करने की कोशिश करने लगे।
राधा माधव लेन में चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल के पास रहने वाले प्रमोद गुप्ता ने बताया कि पंडाल में दर्शन के लिए आने वाले लोगों की कतार करीब 700 मीटर दूर महात्मा गांधी रोड तक पहुंच गई थी।
उन्होंने कहा, ‘‘बारिश शुरू होने तक सब कुछ ठीक था।’’
गुप्ता ने बताया कि तेज बारिश शुरू होते ही अचानक भीड़ बढ़ गई और पंडाल के अंदर मौजूद लोग किसी तरह बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, जबकि बाहर से बड़ी संख्या में लोग अंदर जाने का प्रयास कर रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपने घर के सामने खड़ा था। लोग बाहर निकलने के लिए भाग रहे थे और मुझे उनकी चीख-पुकार सुनाई दे रही थी।’’
गुप्ता ने कहा, ‘‘मैंने और मेरी बेटियों ने चार लड़कियों की मदद की तथा उनसे स्थिति सामान्य होने तक हमारे घर में रहने को कहा।’’
उन्होंने बताया कि पंडाल के निकास द्वार के बाहर गली में कई लोग जमीन पर गिए गए थे, जबकि अन्य लोग उनकी मदद करने में जुटे थे।
गुप्ता ने कहा कि इसके बाद घायलों को एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया।
इलाके की एक अन्य महिला निवासी ने बताया कि गली पहले से ही संकरी थी तथा अस्थायी दुकानें लगने के कारण रास्ता और संकरा हो गया था, जिससे घायलों को जल्द बाहर निकालने और बचाव कार्य में परेशानी हुई।
उन्होंने कहा, ‘‘एम्बुलेंस घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकीं और घायलों को कुछ दूर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा।’’
एक अन्य स्थानीय व्यक्ति ने आरोप लगाया कि पंडाल के अंदर बहुत कम पुलिसकर्मी और स्वयंसेवक तैनात थे, जिससे भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने पंडाल में बांस के ढांचे और अवरोधक तोड़कर बचाव कार्य शुरू किया।’’


