जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में पात्र संस्थागत निवेशकों से मिली मजबूत मांग

जियो प्लेटफॉर्म्स के 30,213 करोड़ रुपये के आईपीओ को संस्थागत निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला। खुलने के 10 मिनट में क्यूआईबी श्रेणी पूरी सब्सक्राइब हुई, मांग दोगुनी पहुंची।

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नई दिल्ली: जियो प्लेटफॉर्म्स के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) में बुधवार को निर्गम खुलने के कुछ ही मिनट के भीतर पात्र संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबी) के लिए आरक्षित हिस्से को पूर्ण अभिदान मिल गया। इस श्रेणी में मांग उपलब्ध शेयर के मुकाबले दोगुना से अधिक रही। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार, सुबह 10 बजे तक क्यूआईबी श्रेणी में मांग 2.86 गुना रही। भारत का अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम माने जा रहे इस आईपीओ में बोली प्रक्रिया शुरू होने के कुछ ही मिनटों के भीतर संस्थागत निवेशकों से मजबूत मांग मिलने लगी। सूत्रों ने बताया कि क्यूआईबी श्रेणी में 4,90,07,827 शेयर रखे गए हैं। निर्गम खुलने के महज 10 मिनट में इस श्रेणी को पूर्ण अभिदान मिल गया, जबकि 30 मिनट से भी कम समय में मांग दोगुनी हो गई। अभी तक पूरे निर्गम को 0.83 गुना अभिदान मिला है।

बुधवार को खुला यह सार्वजनिक निर्गम 23 अक्टूबर को बंद होगा। इसके जरिये कंपनी नए शेयर जारी करके करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। इसमें बिक्री पेशकश (ओएफएस) का कोई हिस्सा नहीं है। जियो प्लेटफॉर्म्स का यह सार्वजनिक निर्गम 2024 में हुंदै मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ को पीछे छोड़कर मूल्य के लिहाज से देश का सबसे बड़ा निर्गम बन जाएगा। जियो के शेयर के लिए 1,065 से 1,119 रुपये के मूल्य दायरे के ऊपरी स्तर पर कंपनी का मूल्यांकन करीब 108 अरब डॉलर बैठता है। इस निर्गम के तहत 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जा रहे हैं। बिक्री पेशकश का हिस्सा नहीं होने का मतलब है कि मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर नहीं बेच रहे हैं।

सार्वजनिक निर्गम से पहले कंपनी ने सोमवार को 212 बड़े (एंकर) निवेशकों को 1,119 रुपये प्रति शेयर की दर से करीब 8,110 करोड़ रुपये के शेयर आवंटित किए थे। एंकर निवेशकों के लिए आरक्षित शेयरों के मुकाबले 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बोलियां मिलीं। जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने मंगलवार को कहा कि कंपनी की प्रौद्योगिकी, कृत्रिम मेधा (एआई) और क्लाउड क्षेत्र में विस्तार की योजनाएं दूरसंचार कारोबार से आगे उसकी वृद्धि को गति देंगी। उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज की इस इकाई को देश के अब तक के सबसे बड़े आईपीओ से पहले एक प्रौद्योगिकी कंपनी के रूप में पेश किया।

अंबानी ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘जियो में ऐसा नहीं है कि हमें दोनों में से किसी एक को चुनना है। हमारा नेटवर्क ही हमारी प्रौद्योगिकी है।’’ यह आईपीओ ऐसे समय आ रहा है, जब निवेशक यह आकलन कर रहे हैं कि क्या देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी अपने विशाल ग्राहक आधार के जरिये डिजिटल सेवाओं, उद्यम प्रौद्योगिकी और एआई से अधिक मुनाफे वाला राजस्व जुटा सकती है। ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि केवल ग्राहकों की संख्या में वृद्धि अब कारोबार के विस्तार को गति देने वाला उतना प्रभावी कारक नहीं रह गई है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।